केदारनाथ को आखिर क्यों कहा जाता है जागृत महादेव
उत्तराखंड के हिमालय में बसा केदारनाथ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां की यात्रा अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है जहां प्रकृति की भव्यता के साथ-साथ ईश्वरीय शक्ति का भी एहसास होता है. यहां के दर्शन जिसे हो जाते हैं वो खुद को सौभाग्यशाली समझता है. पहाड़ों नदीयों के बीच बने इस मंदिर के काफी महीमा है. वहीं केदारनाथ के इस शिवलिंग को जागृत महादेव भी कहा जाता है. जागृत महादेव के पीछे एक प्रसंग काफी प्रचलित है.
शिव भक्त का अद्भुत एहसास
एक ऐसी घटना भी केदारनाथ में एक शिवभक्त जो कई महीनों की कठिन यात्रा के बाद केदारनाथ धाम पहुंचा. दुर्भाग्यवश जब वह वहां पहुंचा तो मंदिर के कपाट बंद हो रहे थे. मंदिर के पंडित ने उसे बताया कि अब छह महीने बाद ही कपाट खुलेंगे, क्योंकि यहां छह महीने बर्फ और ठंड का मौसम रहता है.
भोलेनाथ का चमत्कार
भक्त निराश हो गया लेकिन उसने हार नहीं मानी. वह वहीं पर रोता रहा और भगवान शिव से प्रार्थना करता रहा. रात हो गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया. भक्त भूखा-प्यासा था लेकिन उसे अपने शिव पर पूरा विश्वास था. अचानक उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी. उसने देखा कि एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहे हैं. बाबा ने उससे पूछा कि वह कौन है और कहां से आया है. भक्त ने उसे अपनी सारी कहानी सुना दी.
बाबा को उस पर दया आ गई. उन्होंने उसे समझाया और खाना भी दिया. फिर वो दोनों बहुत देर तक बातें करते रहे. बाबा ने कहा कि उसे लगता है कि सुबह मंदिर जरूर खुलेगा और वह भगवान शिव के दर्शन जरूर करेगा. बातों-बातों में भक्त को नींद आ गई. सुबह जब उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि बाबा कहीं नहीं थे. इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा कि पंडित अपनी पूरी मंडली के साथ आ रहे हैं.
केदारनाथ का कपाट
भक्त ने पंडित को प्रणाम किया और कहा कि कल तो आपने कहा था कि मंदिर छह महीने बाद खुलेगा लेकिन आप तो आज ही आ गए. पंडित ने उसे गौर से देखा और पूछा कि क्या वह वही है जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आया था. भक्त ने कहा कि हां वह वही है. पंडित आश्चर्यचकित हो गए, उन्होंने कहा कि वे तो छह महीने पहले मंदिर बंद करके गए थे और आज छह महीने बाद वापस आए हैं. इतने दिनों तक यहां कोई कैसे जिंदा रह सकता है?
भक्त ने उन्हें सन्यासी बाबा के मिलने और उनके साथ की गई सारी बातें बता दीं. पंडित और सारी मंडली समझ गई कि वह सन्यासी बाबा कोई और नहीं स्वयं भगवान शिव थे. उन्होंने अपनी योग-माया से भक्त के छह महीनों को एक रात में बदल दिया था. यह सब उसके पवित्र मन और उसके विश्वास के कारण ही हुआ था.
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