राजनीति में दिखी आत्मीयता, ‘समधी भेंट’ पर CM साय का दिल छू लेने वाला जवाब
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में अक्सर तीखे बयानों और सियासी खींचतान के बीच कभी-कभी आत्मीयता और पारिवारिक संस्कृति की एक ऐसी खूबसूरत झलक देखने को मिलती है, जो हर किसी का दिल जीत लेती है। धमतरी जिले के छाती गांव में 7 जून को आयोजित 'चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज' के केंद्रीय महाअधिवेशन में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वरिष्ठ भाजपा नेता व विधायक अजय चंद्राकर के बीच हुई ‘समधी भेंट’ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रही है।
विधायक अजय चंद्राकर ने साझा किया खास पल
वरिष्ठ भाजपा नेता अजय चंद्राकर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर मुख्यमंत्री के साथ एक बेहद अनौपचारिक और मुस्कुराती हुई तस्वीर साझा की। उन्होंने पोस्ट में लिखा:"मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के प्रति मेरे मन में अगाध आदर है और मैं उन्हें स्नेह से ‘समधी जी’ कहता हूं। आज धमतरी जिले के ग्राम छाती में आयोजित महाअधिवेशन कार्यक्रम में उपस्थित समाज के लोगों ने इसी आत्मीयता के साथ हम दोनों की एक तस्वीर लेने का आग्रह किया। जन-जन के प्रिय मुख्यमंत्री जी ने भी अपनी चिरपरिचित सहजता से इस पल को यादगार बना दिया।"
मुख्यमंत्री साय ने दिया दिल छूने वाला जवाब
अजय चंद्राकर के इस आत्मीय पोस्ट पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति का सम्मान करते हुए बेहद खूबसूरत जवाब दिया। सीएम साय ने लिखा: "आपका यह स्नेहपूर्ण संबोधन मुझे सदैव आत्मीयता से अभिभूत करता है। ग्राम छाती में समाजजनों के आग्रह पर आपके साथ हुई ‘समधी भेंट’ का यह आत्मीय क्षण मेरे लिए भी स्मरणीय रहेगा। आपका सहज अपनापन, मिलनसार स्वभाव और समाज के लोगों के साथ आपका आत्मीय जुड़ाव हमेशा विशेष रहा है। छत्तीसगढ़ की यही पारिवारिक संस्कृति, अपनापन और आपसी सम्मान हमारी सबसे बड़ी ताकत है।"
सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ
सार्वजनिक जीवन और राजनीति में व्यस्त रहने वाले दो बड़े कद्दावर नेताओं के बीच इस तरह का सहज संवाद इंटरनेट पर नेटिजन्स को काफी पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स इस बातचीत को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, आपसी आदर और पारिवारिक मूल्यों का एक बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि विचारधाराओं और राजनीतिक पदों से ऊपर उठकर इस तरह का अपनापन ही राज्य की असली पहचान है।
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