भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर नई बहस, जाफर ने अगरकर-गंभीर के फैसलों की आलोचना की
नई दिल्ली| भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने के बाद, युवा गेंदबाज आकिब नबी को टीम में शामिल किए जाने की चयन प्रक्रिया पर खुलकर सवाल खड़े किए हैं। मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले तेज गेंदबाज आकिब को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह दी गई है, लेकिन वसीम जाफर का मानना है कि उन्हें किसी खिलाड़ी के रिप्लेसमेंट (विकल्प) के तौर पर नहीं, बल्कि मुख्य और शुरुआती टीम में ही चुना जाना चाहिए था।
'देर आए दुरुस्त आए, लेकिन वे शुरुआत से हकदार थे'
अपने आधिकारिक विचार साझा करते हुए वसीम जाफर ने कहा, 'यह बहुत बड़ी उपलब्धि है और बेहद खुशी का पल है। लेकिन घरेलू क्रिकेट में इतने शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें शुरुआत से ही मुख्य टीम में होना चाहिए था। हालांकि, देर आए दुरुस्त आए। मैं उनके चयन से बेहद खुश हूं क्योंकि वह शुरुआती स्क्वॉड में जगह पाने के पूरी तरह हकदार थे।'
रणजी और इंडिया ए के शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम
आकिब नबी ने पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन के दौरान अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 10 मैचों में कुल 60 विकेट झटके थे और जम्मू-कश्मीर की टीम को पहली बार चैंपियन बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए आईपीएल 2026 में दिल्ली कैपिटल्स की फ्रेंचाइजी ने भी उन्हें अपने साथ जोड़ा। हालांकि, उस दौरान पांच मैचों में वे कोई भी विकेट हासिल नहीं कर सके थे, लेकिन इसके तुरंत बाद इंडिया ए के श्रीलंका दौरे पर खेले गए दो चार दिवसीय मुकाबलों में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट चटकाए और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
अब जसप्रीत बुमराह के चोटिल होकर बाहर होने के बाद उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही आकिब जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले पहले ऐसे पुरुष क्रिकेटर बन गए हैं, जिन्हें भारतीय टेस्ट टीम में चुना गया है। इससे पहले केवल परवेज रसूल और उमरान मलिक को ही सीमित ओवरों (वाइट-बॉल) की भारतीय टीम में जगह मिल सकी थी।
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के फैसलों पर भी की बात
वसीम जाफर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के अब तक के कार्यकाल का भी गहराई से आकलन किया। उन्होंने यह स्वीकार किया कि ट्रॉफियों और परिणामों के लिहाज से अगरकर का कार्यकाल काफी सफल रहा है, लेकिन चयन से जुड़े कई ऐसे फैसले रहे हैं जो लगातार बहस और चर्चा का विषय बने रहे हैं। जाफर ने कहा, 'अगर हम जीती गई ट्रॉफियों और नतीजों के हिसाब से देखें, तो उनका कार्यकाल निश्चित रूप से सफल रहा है। आखिरकार चयनकर्ताओं का मूल्यांकन हमेशा परिणामों से ही किया जाता है। फिर भी, जिस तरह से कुछ खिलाड़ियों के करियर को संभाला गया और कुछ चयन किए गए, वे हमेशा बहस का मुद्दा रहे हैं।'
उन्होंने आगे अपनी बात रखते हुए कहा, 'मोहम्मद शमी, सरफराज खान, अभिमन्यु ईश्वरन और अब आकिब नबी जैसे खिलाड़ियों के चयन से जुड़े मामले कई तरह के सवाल खड़े करते हैं। आखिरकार खिलाड़ियों को उनके चयन और भविष्य को लेकर पूरी स्पष्टता क्यों नहीं मिलती? ये तमाम बातें क्रिकेट गलियारों में नकारात्मक चर्चा का विषय बनती हैं।'
सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत की सफलता को सराहा
वसीम जाफर ने इस बात को भी पूरी तरह स्वीकार किया कि अजीत अगरकर के कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने सीमित ओवरों (वाइट-बॉल क्रिकेट) के फॉर्मेट में बेहद शानदार और दबदबे वाला प्रदर्शन किया है। इस दौरान भारत ने एशिया कप, चैंपियंस ट्रॉफी और लगातार दो टी20 विश्व कप अपने नाम किए। उनके मुताबिक, यदि वर्ष 2023 के वनडे विश्व कप फाइनल को छोड़ दिया जाए, तो टीम ने लगभग हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अपना एकछत्र राज कायम रखा। उन्होंने कहा, 'वाइट-बॉल क्रिकेट में भारत ने पूरी तरह अपना दबदबा बनाया है। हमारे पास असाधारण प्रतिभाएं हैं और टीम ने लगातार ट्रॉफियां जीती हैं। इसलिए कुल प्रदर्शन के आधार पर इस कार्यकाल को सफल कहा जाएगा।'
जसप्रीत बुमराह को बताया भारतीय गेंदबाजी की रीढ़
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए जाफर ने भारतीय टीम की सफलता में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनका स्पष्ट मानना है कि बुमराह के मैदान पर न होने पर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण काफी साधारण नजर आने लगता है। उन्होंने कहा, 'जसप्रीत बुमराह की मैदान पर मौजूदगी पूरी टीम को एक अलग और ऊंचे स्तर पर ले जाती है। जब वे नहीं खेलते तो हमारी गेंदबाजी सामान्य दिखती है, लेकिन उनके खेलने मात्र से विपक्षी टीम हमेशा भारी दबाव में रहती है।'
अंत में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि चयन समिति हमेशा सामूहिक रूप से विचार करके ही कोई फैसला लेती है, फिर भी मुख्य चयनकर्ता की राय का प्रभाव सबसे अधिक रहता है। ऐसे में खिलाड़ियों के चयन, उन्हें बाहर किए जाने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा स्पष्ट संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
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