चेहरे की चमक बचानी है तो स्मॉग में भूलकर भी न करें ये गलतियां
नई दिल्ली। बढ़ते हुए वायु प्रदूषण और जहरीले स्मॉग का यह खतरनाक दौर न केवल हमारे फेफड़ों और सेहत को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि हमारी संवेदनशील त्वचा (स्किन) को भी अंदर से खोखला कर रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के शीर्ष 20 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से आधे अकेले भारत में ही स्थित हैं। ऐसे में इस दूषित माहौल के बीच अपनी त्वचा की अतिरिक्त और विशेष देखभाल करने की बेहद जरूरत है। प्रख्यात त्वचा विशेषज्ञों (डर्मेटोलॉजिस्ट) का ऐसा स्पष्ट मानना है कि यह बढ़ता प्रदूषण हमारी त्वचा का सबसे बड़ा और खतरनाक दुश्मन बन चुका है।
त्वचा की कोशिकाओं में ऑक्सीजन के स्तर को घटाता है प्रदूषण
हमारे आसपास की हवा में मौजूद जहरीली धूल और कार्बन कण हमारी त्वचा की जीवित कोशिकाओं के भीतर ऑक्सीजन के स्तर को तेजी से कम कर देते हैं। त्वचा के ऊतकों में ऑक्सीजन की इस भारी कमी के कारण चेहरे पर समय से पहले ही उम्र के निशान और झुर्रियां उभरने लगती हैं। इसके अलावा, हवा में तैरने वाले खतरनाक फ्री रेडिकल्स त्वचा की कोशिकाओं को पूरी तरह से नष्ट कर देते हैं और प्राकृतिक रूप से कोलेजन के निर्माण की प्रक्रिया को भी पूरी तरह रोक देते हैं।
त्वचा में सूखापन, एलर्जी औरल कील-मुहासों की समस्या
प्रदूषण के दुष्प्रभावों के कारण केवल चेहरे पर झुर्रियां ही नहीं पड़तीं, बल्कि त्वचा अत्यधिक बेजान और रूखी (ड्राई) भी पड़ जाती है। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से होने वाली गंभीर एलर्जी के कारण त्वचा पर जगह-जगह लाल चकत्ते या धब्बे उभर आते हैं तथा चेहरे पर कील-मुहांसे (एनेक्ने) भी बहुत अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं। हालांकि, यदि आप कुछ जरूरी सावधानियां और एहतियात बरतें, तो अपनी त्वचा को इस जहरीले वातावरण के दुष्परिणामों से काफी हद तक सुरक्षित रख सकती हैं।
त्वचा को प्रदूषण से सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी और कारगर उपाय
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नियमित क्लीजिंग और टोनिंग: अपनी त्वचा से धूल-मिट्टी और टॉक्सिन्स को हटाने के लिए हर 4 घंटे के अंतराल पर चेहरे पर किसी अच्छे क्लींजर और टोनर का इस्तेमाल अवश्य करें।
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सनस्क्रीन का अनिवार्य प्रयोग: पराबैंगनी (UV) किरणों से अपनी नाजुक त्वचा का बचाव करने और चेहरे को हमेशा तरोताजा बनाए रखने के लिए रोजाना अच्छी क्वालिटी की सनस्क्रीन क्रीम जरूर लगाएं।
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सैनिटाइज़र का उपयोग करें: वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणुओं से होने वाले संक्रामक रोगों से बचने के लिए अपने हाथों को बार-बार सैनिटाइज करते रहें।
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चेहरे को बार-बार छूने से बचें: अपने हाथों को अपने चेहरे या गालों पर बार-बार न लगाएं, क्योंकि आपके हाथों में लगे अदृश्य कीटाणु चेहरे की संवेदनशील त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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हफ्ते में दो बार स्क्रबिंग: हवा में उड़ने वाली धूल आपकी त्वचा के रोम छिद्रों (पोर्स) को पूरी तरह से बंद कर देती है, जिससे त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती। इससे चेहरे पर ब्लैक हेड्स और पिंपल्स की समस्या बढ़ने लगती है। इसलिए, खासकर तैलीय (ऑयली) त्वचा वाले लोग हफ्ते में कम से कम 2 बार किसी माइल्ड स्क्रब का उपयोग जरूर करें।
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पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं: दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी का सेवन अवश्य करें। घर से बाहर निकलते वक्त भी अपने साथ पानी की बोतल रखें। पर्याप्त पानी पीने से शरीर और त्वचा में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू बनी रहती है, जिससे वातावरण की जहरीली गैसें यदि ब्लड तक पहुंच भी जाएं तो वे शरीर को न्यूनतम नुकसान पहुंचाती हैं।
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गुनगुने पानी से धोएं चेहरा: इस तरह के जानलेवा और जहरीले स्मॉग के बीच बाहर जाना भले ही आज की मजबूरी बन गया हो, लेकिन घर लौटने के तुरंत बाद अपने चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से अच्छी तरह साफ जरूर करें।
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त्वचा की नमी को रखें बरकरार: स्नान करने के बाद तौलिए से शरीर को बहुत हल्के हाथों से सुखाएं। संभव हो सके तो नहाने के तुरंत बाद शुद्ध नारियल के तेल से या किसी अच्छे मॉइस्चराइजिंग बॉडी लोशन से पूरे शरीर की मालिश करें ताकि त्वचा की नमी बरकरार रहे।
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