‘118 विधायक जरूरी’ बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति गरम, क्या Dravida Munnetra Kazhagam बदलेगी खेल?
चेन्नई: तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों हाई-वोल्टेज ड्रामा चल रहा है, जहाँ चुनावी नतीजों के बाद भी सरकार गठन की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी, 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK), सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद बहुमत के आंकड़े के लिए जद्दोजहद कर रही है। विजय अब तक दो बार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन राजभवन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक 118 विधायकों का लिखित समर्थन नहीं मिलता, तब तक सरकार बनाने का दावा अधूरा माना जाएगा। इस बीच, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की सक्रियता ने चेन्नई से दिल्ली तक हलचल तेज कर दी है।
राजभवन में बहुमत का पेंच और राज्यपाल की शर्त
गुरुवार को विजय थलापति ने राज्यपाल से मुलाकात कर 113 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था, जिसे राजभवन ने बहुमत की कसौटी पर अधूरा पाया। राज्यपाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि तमिलनाडु में एक स्थिर सरकार की आवश्यकता है, और इसके लिए जादुई आंकड़ा (118) छूना अनिवार्य है। हालांकि, राजभवन की ओर से विजय को यह आश्वासन जरूर मिला है कि फिलहाल किसी अन्य दल को सरकार बनाने का न्यौता नहीं दिया जाएगा। विजय अब बहुमत की इस खाई को पाटने के लिए छोटे दलों और निर्दलीयों से संपर्क साध रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ी सफलता उनके हाथ नहीं लगी है।
अन्य दलों की चुप्पी और विजय की चुनौतियां
टीवीके को कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन तो मिल चुका है, लेकिन मंजिल अब भी दूर है। विजय की नजरें अब वामपंथी दलों और आईयूएमएल (IUML) पर टिकी हैं, जिनसे समर्थन जुटाने के लिए पर्दे के पीछे लगातार बातचीत चल रही है। पेंच इस बात पर भी फंसा है कि विजय ने खुद दो सीटों पर जीत दर्ज की है, जिसके कारण तकनीकी रूप से उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। ऐसी स्थिति में बहुमत का आंकड़ा भी बदल सकता है। फिलहाल किसी भी अन्य प्रमुख दल ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिससे राज्य में संवैधानिक संकट और राजनीतिक सस्पेंस गहराता जा रहा है।
डीएमके की घेराबंदी और सियासी उलटफेर की सुगबुगाहट
सरकार बनाने की इस खींचतान के बीच डीएमके ने अपने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में ही रहने का सख्त निर्देश जारी किया है। पार्टी नेतृत्व की ओर से कहा गया है कि 'पार्टी हित' में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। बाजार में इस बात की भी चर्चा है कि अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ मिलकर डीएमके कोई 'खेला' कर सकती है या 'ग्रैंड द्रविड़ फ्रंट' के तहत कोई नया दावा पेश कर सकती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन 10 मई की समय सीमा ने यह साफ कर दिया है कि अगले 48 घंटे तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
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