भोपाल में 24 फरवरी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का किसान सम्मेलन, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे होंगे शामिल
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में 24 फरवरी को बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल सकता है. कांग्रेस ने राजधानी भोपाल में किसान सम्मेलन आयोजित करने का फैसला किया है, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल होंगे. इस सम्मेलन को पार्टी आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम मान रही है।
ट्रेड डील के विरोध में सम्मेलन
यह सम्मेलन अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किया जा रहा है. कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह के समझौतों से देश के किसानों, खासकर मक्का और सोयाबीन उत्पादकों को नुकसान हो सकता है. मध्य प्रदेश देश के प्रमुख मक्का और सोयाबीन उत्पादक राज्यों में से एक है, ऐसे में पार्टी इस मुद्दे को बड़े जनआंदोलन के रूप में उठाने की तैयारी में है।
रणनीतिक बैठक के बाद निर्णय
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में छह राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और नेता प्रतिपक्षों की बैठक में यह रणनीति तय की गई कि 24 फरवरी को भोपाल में किसानों के मुद्दे पर व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा. इस सम्मेलन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे. पार्टी इसे राष्ट्रीय स्तर पर किसान हितों की आवाज बुलंद करने का मंच मान रही है।
एमएसपी और कीमतों पर असर की आशंका
पार्टी का कहना है कि यदि आयात नीति में ढील दी गई या अमेरिकी कृषि उत्पादों को रियायत दी गई तो इसका सीधा असर देश के किसानों की उपज के दामों पर पड़ेगा. विशेष रूप से सोयाबीन और मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. कांग्रेस इस मुद्दे को किसान हितों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राष्ट्रीय संदर्भ में सम्मेलन की अहमियत
भोपाल में होने वाला यह सम्मेलन केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर के किसान मुद्दों से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस नेतृत्व का प्रयास है कि मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य से किसान असंतोष की आवाज बुलंद की जाए और इसे व्यापक आंदोलन का रूप दिया जाए।
प्रशासनिक तैयारियां तेज
राजधानी में होने वाले इस बड़े आयोजन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी तेज हो गई हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं को जिले-जिले से भोपाल पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है. माना जा रहा है कि यह सम्मेलन आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है और किसान मुद्दों को लेकर सियासी माहौल को गर्मा सकता है।
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