फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने का मामला उजागर, 170 से अधिक लोग जांच के दायरे में
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि विभाग में फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के 72 मामले सामने आए हैं। विधानसभा में बालेश्वर साहू द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत मिली है, उनकी जांच के लिए मेडिकल बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं। इन मामलों में सभी कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। 21 नवंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच पूरी होने तक किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। मंत्री ने यह भी माना कि इस मामले में अब तक कोई जांच कमेटी नहीं बनाई गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नौकरी में बहाल
कृषि विभाग में ही तीन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत सही पाई गई। इन तीनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, लेकिन इनमें से एक को हाईकोर्ट के आदेश के बाद नौकरी में बहाल कर दिया गया है। विधानसभा में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वालों की जानकारी भी मांगी गई। अनुज शर्मा के सवाल पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग के अंतर्गत उच्च स्तरीय जांच समिति ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर 98 लोगों को सरकारी नौकरी में पाया है। फिलहाल इन सभी मामलों की जांच चल रही है।
बड़े पैमाने पर चल रहा खेल
सरकार के जवाब के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य में बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का खेल चल रहा है। इन मामलों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जांच प्रक्रिया तो चल रही है, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के कारण सरकार कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रही है। अगर इस घोटाले में दोषियों पर कार्रवाई की गई तो 170 से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे से भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो और इस तरह के फर्जीवाड़े पर सख्ती से रोक लगे।
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