चमत्कार से कम नहीं है राजस्थान के इस मंदिर का जलकुंड, हजारों गैलन पानी निकालने के बाद भी नहीं होता कम
राजस्थान के अजमेर में बोराज गांव के पास अरावली की पहाड़ियों पर स्थित मां चामुंडा का ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर की स्थापना सम्राट पृथ्वीराज चौहान द्वारा 11वीं शताब्दी में की गई थी. यह मंदिर सदियों से धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां मंदिर परिसर में जल का एक छोटा सा कुंड है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है. यह कुंड ढाई फीट गहरा और ढाई फीट चौड़ा है. बताया जाता है कि जब से मंदिर की स्थापना हुई है, तब से लेकर आज तक इस कुंड का पानी कभी कम नहीं हुआ.
रोगों से मुक्ति प्रदान करता है कुंड का पानी
मंदिर के पुजारी मदन सिंह ने बताया कि प्रांगण में जो जलकुंड है, वह काफी प्राचीन है. इस कुंड से हजारों गैलन पानी निकाला जाता रहा है, फिर भी यह कभी खाली नहीं होता है. मंदिर में माता का स्नान भी इस कुंड के पानी से होता है. सर्दियों में यह पानी गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है. इस कुंड के जल को गंगा के समान पवित्र माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस कुंड का जल आध्यात्मिक शुद्धि और रोगों से मुक्ति प्रदान करता है.
सिक्के डालकर मांगते है मन्नत
पुजारी मदन सिंह ने आगे बताया कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान चामुंडा माता के अनन्य भक्त थे. ग्यारहवीं शताब्दी में इसी कुंड के पानी से समूचे मंदिर का निर्माण कराया गया था. लोग चामुंडा माता मंदिर के दर्शन के साथ-साथ कुंड को भी आस्था केंद्र मानते हुए नमन करते हैं. इसमें सिक्के डालकर मांगते मांगते हैं.
1300 फीट की ऊंचाई पर स्थित मंदिर
मां चामुंडा का मंदिर लगभग 1300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पूरे देश से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. मन्नत पूरी होने पर भक्त मां के मंदिर में चुनरी बांधते हैं. पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस मंदिर में माथा टेककर हर श्रद्धालु खुद को धन्य महसूस करता है
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