इंदौर में कचरे को बनाया कमाई का आधार, कचराघर बन रहा ऊर्जा का भंडार

इंदौर। स्वच्छता के नवाचार अब मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम के संस्कारों में ढलते जा रहे हैं। देश में पहली बार संयंत्र लगाकर बड़े स्तर पर यहां गीले कचरे से बायो सीएनजी बनाने का काम शुरू हुआ है। परिणामस्वरूप, यहां ट्रेंचिंग ग्राउंड में पसरा कचरा ऊर्जा भंडार बन चुका है। योजना प्रतिदिन 500 टन गीले कचरे से 18 हजार किलो गैस बनाने की है। फिलहाल, ट्रेंचिंग ग्राउंड में गैस तैयार करने का प्रथम चरण शुरू है। बायो सीएनजी संयंत्र के डाइजेस्टर में गोबर व गीला कचरा डालकर कल्चर तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। दिसंबर के अंत तक कल्चर तैयार होगा।

वर्तमान में शहर में कबीटखेड़ी और चोइथराम मंडी में संचालित संयंत्रों से भी कल्चर लाकर यहां मिलाया गया है। इसके बाद इसमें प्रतिदिन 10 से 15 टन गीला कचरा मिलाने की प्रक्रिया शुरू होगी। जनवरी के अंत तक शुद्ध बायो सीएनजी तैयार होने लगेगी, जो वाहनों के काम आएगी। संयंत्र में तैयार गैसों से शहर में 400 सीएनजी बसों के संचालन की तैयारी है, जो अगले दो महीने में यहां आएंगी। नगर निगम के कार्यपालन यंत्री अनूप गोयल का दावा है कि बसों के आने के पहले संयंत्र में गैस तैयार होने लगेगी।

संयंत्र में तैयार होने वाली 50 प्रतिशत गैस का उपयोग सिटी बसों को चलाने में होगा। शेष गैस अवंतिका गैस एजेंसी को दी जाएगी, जो अन्य वाहनों को इसे उपलब्ध कराएगी। बचे अपशिष्ट से खाद बनाई जाएगी। बता दें कि वर्तमान में प्रतिदिन चोइथराम मंडी के संयंत्र में 20 टन व कबीटखेड़ी में 15 टन गीले कचरे से क्रमश: 600 व 350 किलो गैस तैयार हो रही है। 80 फीसद गैस से प्रतिदिन करीब आठ सिटी बसों का संचालन हो रहा है। शेष गैस आटो रिक्शा व अन्य वाहन को दी जाती है।