छत्तीसगढ़ में कोरोना के मोर्चे पर तैनात हैं एमबीबीएस उत्तीर्ण डाक्टर

रायपुर। देश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच डाक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को हुई बैठक में एमबीबीएस उत्तीर्ण डाक्टरों और नए नर्सिंग स्टाफ की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है। बैठक में आए इस प्रस्ताव पर बाकी राज्य अभी विचार कर रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में करीब 10 दिन पहले ही इस पर अमल हो चुका है।

छत्तीसगढ़ में सरकार ने एमबीबीएस उत्तीर्ण 296 नए डाक्टरों की पदस्थापना की है। इन नए डाक्टरों को प्रदेश के विभिन्न शासकीय मेडिकल कालेज अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों, मातृ एवं शिशु अस्पतालों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ किया है। इन्हें शर्तों के तहत दो वर्ष के लिए संविदा नियुक्ति दी गई है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में चिकित्सा और दंत चिकित्सा स्नातक प्रवेश नियम के तहत एमबीबीएस में दाखिला लेने वालों से बंधन पत्र (बांड) लिया जाता है। बांड के अनुसार पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें दो वर्ष तक अनिवार्य रूप से राज्य में सेवा देनी पड़ती है। यह बांड 25 से लेकर 50 लाख रुपये का होता है।

इसके उल्लंघन पर बांड की राशि की वसूली, विश्वविद्यालय से अंतिम डिग्री प्रदान नहीं किए जाने और राज्य मेडिकल काउंसिल में पंजीयन नहीं किए जाने के साथ ही पाठ्यक्रम अवधि के दौरान सरकार की तरफ से दी गई पूरी छात्रवृत्ति/शिष्यवृत्ति की राशि की वसूली भू-राजस्व के बकाया के रूप में किए जाने का प्रविधान है।

इसी तरह प्रदेश में नर्सिंग स्टाफ की कमी दूर करने के लिए नर्सिंग के विद्यार्थियों की मदद लेने का फैसला किया गया है। इसके तहत उन्हें कोरोना के मरीजों के इलाज, कोविड-19 प्रोटोकाल, कोविड अनुकूल व्यवहार, कोविड-19 केयर व प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनकी मदद ली जा सके।

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