संक्रमित की माैत, आधी रात तक नहीं हुई अंत्येष्टि

ग्वालियर। ईटमा निवासी कोरोना संक्रमित 40 वर्षीय जितेंद्र उर्फ बल्ली रावत का सोमवार की शाम सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल में भर्ती होने से पहले ही निधन हो गया। निधन के उपरांत शव जब गांव पहुंचा तो गांव वालों ने गांव में अंत्येष्टि करने का विरोध कर दिया। स्वजन ने जब प्रशासन से गुहार लगाई तो आधी रात को पटवारी, पंचायत सचिव मौके पर पहुंचे तब आधी रात के बाद मृतक का अंतिम संस्कार हाे सका। मृतक के परिवार में पत्नी, मां और बेटा भी संक्रमित है

स्वजन के मुताबिक 10 दिन पहले बल्ली रावत ने कोरोना के लक्षणों के चलते जांच कराई। रिपोर्ट में पॉजिटिव आने पर उन्हें 22 अप्रैल को भितरवार भेज दिया गया। यहां से उन्हें आइसोलेशन सेंटर पहुंचा दिया गया। आइसोलेशन सेंटर में तमाम अव्यवस्थों के चलते स्वजन इन्हें तीन दिन बाद घर ले आए। सोमवार को उनकी तबियत बिगड़ी तो उन्हें गांव के पटवारी ने एंबुलेंस से ग्वालियर सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल भिजवाया। शाम करीब छह बजे जब वे हास्पिटल के गेट पर थे तो अस्पताल कर्मचारियों ने कागजी कार्रवाई के लिए दस्तावेज (पॉजिटिव रिपोर्ट) मांगे, न होने की स्थिति में करीब आधा घंटे खराब हो गया। इसके बाद अस्पताल कर्मचारियों ने आक्सीजन लगाया। चंद मिनटों बाद ही स्टॉफ ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

खेत में शव छोड़ आई एंबुलेंसः अस्पताल में मौत के बाद शव को प्लास्टिग बैग में पैक कर एंबुलेंस से गांव पहुंचाया गया। शव के गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों ने शव की अंत्येष्टि गांव में करने का विरोध कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि बॉडी को शहर में ले जाओ। इसके बाद स्वजन ने प्रशासन के अफसरों को फोन लगाया। मृतक के स्वजन का कहना था कि परिवार में कोई अन्य पुस्र्ष सदस्य नहीं है। इसके बाद रात करीब एक बजे तहसीलदार ने पटवारी और पंचायत सचिव को पीपीई किट लेकर गांव भेजा । इसके बाद रात तीन बजे करीब अंतिम संस्कार हाे सका। खबर है कि मृतक की पत्नी आैर मां की भी तबियत बिगड़ गई है।

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