आक्सीजन के लिए ट्रामा के बाहर चार घंटे तड़पता रहा कोविड मरीज

कोरबा । होम आइसोलेशन में अचानक सांस लेने दिक्कत हुई, तो हालत बिगड़ने पर एक युवक को उसी के वैन से श्रीबालाजी ट्रामा सेंटर लाया गया। स्टाफ ने पहले कहा, जगह नहीं है। फिर डाक्टर के अनुपस्थित होने का बहाना देकर भर्ती नहीं दिया। युवक अपने वैन में ही घंटों तड़पता रहा।

एक-एक कर चार घंटे बीते तब डाक्टर साहब पहुंचे। दो टूक कह दिया, जगह नहीं है कहीं और ले जाओ। इस बीच परिजनों ने इस अव्यवस्था का वीडियो बना इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया था। इस तरह बालाजी प्रबंधन की मनमानी सरेआम होने लगी, तो दबाव में इस मरीज को अस्पताल में भर्ती कर आक्सीजन नसीब हुआ।

यह मामला सोमवार की सुबह उस वक्त सामने आया, जब करीब 30 साल का एक युवक जिला अस्पताल परिसर स्थित श्रीबालाजी कोविड हास्पिटल के बाहर एंबुलेंस में पड़ा तड़पता देखा गया। कुसमुंडा के गंगानगर रहने वाला रवींद्र यादव पेश से वैन का ड्राइवर है।

रविवार को ही एंटीजन टेस्ट कराने के बाद वह होम आइसोलेशन पर था। सोमवार की सुबह उसे चक्कर आया और सांस लेने में तकलीफ शुरू हुई। हालत बिगड़ता देख परिजन उसे सुबह करीब आठ बजे ट्रामा सेंटर स्थित कोविड अस्पताल ले आए। रवींद्र को साथ लेकर आए उसके बहनोई रमेश यादव ने बताया कि पहले अस्पताल के कर्मचारी डाक्टर नहीं होने की बात कह उन्हें टालते रहे।

चार घंटे बाद कहीं जाकर डाक्टर आया और उसने भी बिस्तर खाली नहीं होने की बात कह चलता करने का प्रयास किया। रवींद्र को एक-एक सांस के लिए तड़पता देख परिजन परेशान हो रहे थे, तो उन्होंने इस घटना की वीडियो तैयार कर इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दी।

उन्होंने वीडियो में दिखाया कि किस तरह एक मरीज आक्सीजन व उपचार के लिए अस्पताल आकर भी गेट के बाहर चार घंटे से तड़प रहा है। तब जाकर दबाव बना और रवींद्र को ट्रामा सेंटर में भर्ती कर लिया गया। तब जाकर उसे राहत की सांस मिल सकी।

बाद में सीपेट भेजा, कलेक्टर के हस्तक्षेप पर फिर लाए

अभी रवींद्र ने चैन की चंद सांसे ही ली थी कि ट्रामा सेंटर में फिर ड्रामा शुरू हो गया। उसे स्याहीमुड़ी स्थित सीपेट कोविड अस्पताल भेज दिया गया। वहां जाकर परिजनों ने जब व्यवस्था की जानकारी ली, तो स्टाफ ने बताया कि बिस्तर व आक्सीजन तो है, पर मरीज की देख-रेख या उपचार के लिए न तो डाक्टर है और न ही दवा। ऐसे में परिजन एक बार फिर चिंतित हो गए और उन्होंने पुनः उसे बालाजी शिफ्ट करने की जिद शुरू कर दी। इस बार यह शिकायत कलेक्टर किरण कौशल तक पहुंच गई, जिसके बाद उनके हस्तक्षेप करने पर रवींद्र को सीपेट से शिफ्ट कर शाम करीब चार बजे पुनः ट्रामा सेंटर लाकर भर्ती किया गया। यहां उसका उपचार व देख-रेख किया जा रहा है।

सीपेट के 695 बेड खाली पड़े, क्योंकि स्टाफ है न दवा

कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए प्रशासन भले ही पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं, बिस्तरों व आक्सीजन होने का दावा करते थक रहा हो पर इस घटना से व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। कुल 885 बिस्तरों वाले सीपेट में 695 बेड खाली पड़े हैं, जहां सुविधा के अभाव में कोई जाना नहीं चाहता।

यहां मरीजों को होम आइसोलेशन की तरह केवल सोने के लिए सुविधा है, जबकि चिकित्सकीय स्टाफ की देखरेख या दवाओं की व्यवस्था अब तक मुकम्मल नहीं की जा सकी है। यहां 30 बिस्तर में आक्सीजन लगाया है पर मरीज की हालत खराब होने पर न तो इलाज की व्यवसथा है और न ही मेडिसिन की। आधे-अधूरे इंतजाम दिखा प्रशासन सबकुछ पर्याप्त होने का दावा करता फिर रहा।

एक दिन पहले अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में तोड़ा दम

कुछ ऐसी ही समस्या से गुजरते एक मरीज का मामला एक दिन पहले भी सामने आया था। महाराणा प्रताप नगर में रहने वाले 40 वर्षीय शशांक पांडेय कोरोना संक्रमित हैं, जो होम आइसोलेशन पर थे। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें एंबुलेंस से एसईसीएल कोरबा क्षेत्र अंतर्गत मुड़ापार स्थित अस्पताल में लाया गया। उन्हें भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी

आक्सीजन मिल जाने की आस में पांडेय एसईसीएल असपताल लाए गए थे पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें भर्ती करना तो दूर आक्सीजन तक देने से इंकार कर दिया। कोविड मरीज होने के कारण उन्हें कोई देखने तक बाहर नहीं आया और एंबुलेंस में ही उनकी मौत हो गई।

रेमडेसिविर खत्म, बिलासपुर-जांजगीर से आने की बात हवा

रेमडेसिविर का इंजेक्शन एक बार फिर जिले में खत्म हो गया है। रविवार की शाम को ही प्रशासन के पास इस दवा की उपलब्धता शून्य हो चुकी थी। सोमवार को इसके आने व उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा प्रशासन कर रहा था, जो कोरा साबित हो गया।

इस दवा के लिए रेडक्रास से पर्ची लिखवाने पर मिलती है, पर निहारिका क्षेत्र में संचालित व अधिकृत किए गए मेडिकल स्टोर में भी रेमडेसिविर नहीं मिल रहा है। जिला प्रशासन पिछले 24 घंटे से अधिक समय से इसे उपलब्ध कराने लगातार प्रयास की बात कह रहा पर न तो प्रयास खत्म हुआ और न दवा आ सकी। पड़ोसी जिला जांजगीर-चांपा व बिलासपुर में स्टाक पर्याप्त व खपत कम होने पर मंगाने की बात कही पर यह बात भी हवा हवाई साबित हुई।

0 कोविड अस्पतालों में बेड व आक्सीजन

ईएसआइसी – 142 बेड -28 में आक्सीजन

बाल्को -50 बेड -17 में आक्सीजन

सीपेट -885 बेड -30 में आक्सीजन व 695 खाली

एनकेएच कोसाबाड़ी -50 बेड -30 में आक्सीजन

बालाजी ट्रामा -74 बेड -23 में आक्सीजन

सृष्टि -50 बेड -17 में आक्सीजन

जीवनआशा -40 बेड -23 में आक्सीजन

कुल -1291 बेड -357 आक्सीजन युक्त

(सीपेट स्याहीमुड़ी को छोड़कर शेष सभी अस्पताल के बेड भर चुके हैं)

हमारे यहां 60 बेड की सुविधा है, पर उसके बाद भी मरीजों के लिए अतिरिक्त 14 बिस्तरों की व्यवस्था भी रखी गई है। क्षमता से ज्यादा मरीजों को रखने पर अव्यवस्था फैलेगी, इसलिए जहां उपलब्धता हो वहीं लेकर जाने की सलाह दी गई थी। इसके बाद भी परिजन उसे यहीं भर्ती कराने की जिद पर अड़े रहे।

– डा प्रिंस जैन, प्रभारी श्रीबालाजी कोविड अस्पताल ट्रामा सेंटर

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