Bhopal Human Trafficking : महिला बोली मेरे दस बच्चे, सबके गलत नाम बताए

भोपाल। भिक्षावृत्ति में लगे 68 लोगों को रेस्क्यू करने के बाद बाल कल्याण समिति ने मंगलवार को ही आदिवासी छात्रावास में इनकी काउंसिलिंग शुरू कर दी। शुरुआती बयानों से बाल कल्याण समिति ने भी मानव तस्करी की आशंका जताई है। समिति के सदस्य कृपा शंकर चौबे के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह मानव तस्करी का मामला लग रहा है। दरअसल, समिति ने जब रेस्क्यू किए गए लोगों से बातचीत की तो उनके विरोधाभासी बयान सामने आए।

कानपुर की एक महिला ने दावा किया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों में दस बच्चे उसके हैं, लेकिन महिला ने सभी बच्चों का नाम गलत बताया। वहीं बच्चों ने भी माता-पिता के अलग-अलग नाम बताए। हैदराबाद की एक महिला चार बच्चों को अपना बता रही है, जबकि इसमें तीन बच्चे तो उसकी भाषा में बात कर रहे हैं, लेकिन एक बच्ची हिन्दी बोल रही है। वहीं उस महिला का पति होने का दावा करने वाला पुरुष भी बच्चों का नाम अलग-अलग बता रहा है।

डीएनए टेस्ट भी हो सकता है

चौबे ने बताया कि विरोधाभासी बातें सामने आने की वजह से मानव तस्करी के मामले में एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है और सभी का डीएनए टेस्ट भी किया जा सकता है, ताकि बच्चों के असली माता-पिता की जांच की जा सके।

ऐसे काम करता था पूरा समूह

बाहर से आए 68 लोगों ने दो जगह अपना अस्थाई डेरा बनाया हुआ था। रमजान के महीनों में ये लोग मस्जिदों के आसपास घूमते थे और आम दिनों में छोटे बच्चों को गोद में लेकर चौराहों पर भीख मांगते थे।

बाल विवाह हुआ था

चाइल्ड लाइन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर अमरजीत सिंह ने बताया कि डेरे में मिली कुछ युवतियों की उम्र 21-22 वर्ष है, लेकिन उनके 3-3 बच्चे हैं। इससे लगता है कि इनका बाल विवाह हुआ था। साथ ही मासूम बच्चों को साथ रख उनका इस्तेमाल अधिक भीख लेने के लिए किया जा रहा था।

दिव्यांग एक, ट्रायसाइकिल पांच

दोनों डेरों में मिले 5 बुजुर्गों में से सिर्फ एक व्यक्ति का ही एक पैर नहीं है। बाकी आराम से चल सकते हैं। लेकिन डेरों पर 4 ट्रायसाइकिल मिली हैं। आशंका है कि दिव्यांग होने का ढोंग करते हुए भीख मांगने के लिए ट्रायसाइकिल का इस्तेमाल किया जाता होगा।

एक के पास ही मिला आधारकार्ड, कई लोगों के पास मोबाइल फोन

अमरजीत ने बताया कि काउंसलिंग में पता चला कि इनमें से कुछ लोग तीन वर्ष पहले भोपाल आ गए थे। कुछ एक वर्ष पहले आना बता रहे हैं। हर परिवार के पास मोबाइल फोन तो है, लेकिन पहचान के नाम पर 68 लोगों में से सिर्फ एक के पास ही आधार कार्ड मिला है।

महिलाओं की संख्या अधिक

68 लोगों में 10 पुरुष और 14 महिलाएं हैं। पूछताछ में एक युवती के पास मिले दो मासूम बच्चों को उसने अपनी बहन के बच्चे होना बताया है। जो भोपाल में नहीं रहती।

भोपाल में लगभग 1 हजार बच्चे करते हैं भिक्षावृत्ति

विभिन्न संगठनों से मिले इनपुट के आधार पर प्रशासन का मानना है कि राजधानी के विभिन्न इलाकों में करीब एक हजार बच्चे भिक्षावृत्ति कर रहे हैं। इनमें से कई मानव तस्करी कर भोपाल लाए गए हैं। कुछ बच्चे सामूहिक रूप से भीख मांग रहे हैं तो कुछ व्यक्तिगत रूप से। इसे खत्म करने के लिए ही खुशहाल नौनिहाल अभियान चलाया जा रहा है।

ऐसे दिखाते हैं बच्चों को बीमार

जानकारों के मुताबिक भिक्षावृत्ति करने वाले लोग अपने साथ बच्चों को रखते हैं और उन्हें बीमार दिखाने के लिए अफीम चटाते हैं, इससे नशे में बच्चों की गर्दन लटक जाती है और लार टपकती रहती है और बच्चा बीमार दिखता है।