48 घंटे के भीतर पता चलेगा शरीर में कितना रेडिएशन

भोपाल। परमाणु अटैक व रेडिएशन पैदा करने वाली अन्य आपदाओं से निपटने के लिए भोपाल के बीएमएचआरसी में लैब बनाई गई है। यहां पर ‘रेडिएशन बॉयोडोसिमेट्री टेस्ट’ किया जाएगा। इसमें यह पता चल सकेगा किसी व्यक्ति के शरीर में कितना रेडिएशन है। खून के नमूने लेकर जांच करने से रेडिएशन का पता चल जाएगा। यहां यह सुविधा शनिवार से शुरू कर दी गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास सगंठन (डीआरडीओ), दिल्ली के महानिदेशक डॉ. एके सिंह ने इस लैब का शुभारंभ किया।

डॉ. सिंह ने कहा कि आम नागरिकों में रेडिएशन का स्तर पता लगाने के लिए यह देश की दूसरी लैब है। इसके पहले एक लैब मंगलौर में चल रही है। यह लैब आपदा के दौरान पीड़ित मरीज में रेडिएशन का स्तर पता लगाने में बहुत मददगार साबित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस लैब से गर्भ में पल रहे शिशु की जन्मजात विकृतियों को भी पता लगाया जा सकता है। यहां पर रेडिएशन इमरजेंसी को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। इसमें डीआरडीओ के वैज्ञानिक, आपदा प्रबंधन संस्थान भोपाल के निदेशक डॉ. राकेश दुबे व अन्य अधिकारी मौजूद थे।

बीएमएचआरसी में रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रमुख डॉ. पुनीत गांधी ने बताय कि रेडिएशन की मात्रा पता करने के लिए ब्लड सैंपल लेकर 48 घंटे तक कच्लर में रखा जाता है। इसके बाद रिजल्ट आता है। उन्होंने बताया कि अभी तक रेडियोग्राफर व कैथ लैब के कर्मचारियों में रेडिएशन नापने की सुविधा भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर (बार्क) में है। आम मरीजों में रेडिएशन का स्तर पता करने के लिए मंगलौर के बाद यह देश की दूसरी लैब है।

रेडियोग्राफर का सैेंपल अब मुंबई नहीं भेजना पड़ेगा

एक्सरे, सीटी स्कैन, कैथ लैब में काम करने वाले रेडियोग्राफर व टेक्नीशियन को रेडिएशन लगने का खतरा ज्यादा रहता है। इन कर्मचारियों के ब्लड के नमूने लेकर भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर मुंबई भेजे जाते हैं। देश भर से हर दिन 10 सैंपल यहां आते हैं। क्षमता कम होने की वजह से कई कर्मचारियों के सालों तक सैंपल ही नहीं हो पाते। बीएमएचआरसी में लैब शुरू होने से इन कर्मचारियों की जांच यहीं पर हो जाएगी। अन्य लोगों की जांच डॉक्टरों की सलाह पर हो सकेगी।