सर सैयद  अहमद खान की सोच और आज के हालात

 

 

समाज सेवक अनस अली (प्रदेश संगठन सचिव-प्रवक्ता ,मुस्लिम विकास परिषद भोपाल) की क़लम से सर सैयद  अहमद खान पर खास लेख।

क्या कभी कोई शख्श आज से 100-200 साल आगे का सोच सकता है?? 

नहीं!!
पर तारीख़ में एक ऐसी अज़ीमुश्शान शख्शियत गुज़री है जिसने ये कारनामा अंजाम दिया है जी हां मैं यहां बात कर रहा हूँ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के फॉउंडर “सर सैयद अहमद खान” की जिन्होंने आज से 200 साल पहले 19वी सदी में जदीदी तालीम यानी आधुनिक शिक्षा की अहमियत को जाना।।


उनका मानना था कि आने वाला वक्त सांइस का है।


और एक बेहतर मुस्तकबिल के लिए तालीमयाफ्ता होना लाज़मी है,जिसके लिए उन्होने “अलीगढ़ मूवमेंट चलाया”और 1875 में पहला मोहम्मडन औरयंटल कॉलेज की नींव डाली जो आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से जाना गया।।
इस मिशन को पूरा करने के लिए उन्हें बहुत जद्दोजहद करना पड़ी कई मुश्किलों का सामना किया मगर उन्हें हमारे माशरे में तब्दीली लाना था, जदीदी तालीम से लोगों को जोड़ना था और लोगों को साइंस से रूबरू कराना था,साइंस मुसलमानों के लिए कोई नई चीज़ नहीं थी बल्कि हमने उससे मुहं मोड़ लिया था ,खिलाफत ए उस्मानिया के वक्त का बगदाद का शहर दुनिया भर के लोगों के लिए एक तालीमी मरकज़ था जिसमे उस वक़्त की सबसे बड़ी लाइब्रेरी हुआ करती थी जिन किताबो ने आज की कई साईंटिफिक इंवेंशनों को जन्म दिया और उनको एक नई सोच दी।।
तभी तो अल्लामा इक़बाल लिखते हैं “कभी ए नौजवान मुस्लिम तदव्वुर भी किया है तूने किस गरदूम का है एक टूटा हुआ तारा”
सोचिये सर सैयद अहमद खान रह. की एक कोशिश ने एक सोच ने हमारे मुल्क़ को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दी जिसमें अभी तक इस मुल्क के कई मारूफ़ शख्शियतों ने तालीम हासिल करके नाम कमाया है चाहे पूर्व राष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन हो या पूर्व उपराष्ट्रपति डॉ हामिद अंसारी साहब हो।।
एक बार ज़रा गौर करे 200 साल पहले उन्होने जदीदी तालीम और सांइस अहमियत को जाना था पर अफ़सोस हम लोग इसकी अहमियत को अभी तक नहीं पहचान पाये,हमारे इलाकों में कितने स्कूल है कितने कॉलेज इससे हमे कोई मतलब नहीं है और ना हम स्कूलों-कॉलेजों को मुद्दा बनाते।।
आज कई रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करती है कि मुसलमानों के पिछड़ेपन की सबसे बड़ी वजह शिक्षित ना होना है।।
अभी भी वक़्त है हम सबको इस पर गौर फिक्र करने की कोशिश करने की हमारे घर का पड़ोस का आस पास का एक ऐसा माहोल बने जिसमे हर बच्चा स्कूल जाने वाला बने।।
तालीम शिक्षा का ये मकसद नही कि आप नौकरी करे सर्विस करे मगर तालीम शिक्षा आपको आज के वक़्त के साथ खड़ा करती है आपको सोच देती है झूठ फरेब को पहचानने की सलाहियत देती है।।।

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