छतरपुर कलेक्टर का अमानवीय व्यवहार, गंभीर बीमार मरीज को किया पुलिस के हवाले

छतरपुर: कोरोना संकट के बीच जहां एक तरफ कई पुलिस व स्वास्थ्य अधिकारी वारियर के रुप में सामने आए हैं वहीं छतरपुर जिसा कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह का अमानवीय व्यवहार सामने आया है। कलेक्टर ने जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक मरीज को हवालात में भेज दिया। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉक डाउन के दौरान सभी जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारियों को इस बात के निर्देश दिए थे कि किसी भी बीमार व्यक्ति को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। बावजूद इसके छतरपुर जिला कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने इलाज के लिए पहुंचे एक मरीज को थाने में बैठा दिया।

जानकारी के अनुसार, रीना अर्जरिया अपने पति बालाप्रसाद अरजरिया को डायलिसिस के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची थी, लेकिन डायलिसिस विभाग ने बिना सिविल सर्जन की अनुमति के डायलिसिस करने से मना कर दिया। जिसके बाद दोनों पति पत्नी सिविल सर्जन के पास अनुमति मांगने के लिए अस्पताल के अंदर जाने लगे, लेकिन तभी गार्ड ने उन्हें इस बात की जानकारी दी कि छतरपुर कलेक्टर जिला अस्पताल के अंदर दौरे पर हैं। आप लोग अंदर नहीं जा सकते इस पर बाला प्रसाद ने कहा कि वह गंभीर बीमार है और उससे डायलिसिस की सख्त जरूरत है।

इतना कहते हुए वह अंदर जाने लगा तो गार्ड ने उसे थप्पड़ मार दिया। बाला प्रसाद की पत्नी विनर अरजरिया ने जब थप्पड़ का विरोध किया तो उसी समय जिला कलेक्टर शीलेंद्र सिंह आ गए और दोनों पति पत्नी को पुलिस से कहकर थाने में भिजवा दिया साथ ही उन पर कार्रवाई करने की बात भी कही। बाला और रीना अरजरिया का कहना है कि उन्हें तो इस बात का पता ही नहीं है कि कलेक्टर ने उन्हें पुलिस से क्यों पकड़वाया और थाने किस लिए भेजा। मामला जैसे ही मीडिया के संज्ञान में आया तो पुलिस ने तुरंत दोनों से एक आवेदन लिखवाने के बाद छोड़ दिया।