पहले बकाया, फिर छूट और फंड की दरकार, झारखंड ने केंद्र से मांगी मदद

रांची। Lockdown Extention कोरोना के कारण नई चुनौतियों को झेल रही राज्य सरकार को अब चार मोर्चों पर केंद्र से तत्काल सहायता की जरूरत है। चारों अलग-अलग मोर्चे भले हों, इनका संबंध राज्य की लचर आर्थिक स्थिति से ही है। इन मोर्चों पर सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री के स्तर से केंद्र को प्रस्ताव भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है, जिसमें बकाया भुगतान, ब्याज में छूट, राजकोषीय घाटा की न्यूनतम सीमा को आगे बढ़ाने और तत्काल सहायता राशि की मांग प्रमुख है। वित्त विभाग से इस संदर्भ में प्रस्ताव तैयार कर दिया गया है और कैबिनेट की बैठक की तिथि तक इन प्रस्तावों को केंद्र भेज भी दिया जाएगा।

राज्य सरकार ने सबसे पहले पिछले वित्तीय वर्ष की बकाया राशि पर दावा ठोका है। जीएसटी के तहत काटी गई राशि में से लगभग 650 करोड़ राज्य सरकार को पिछले वित्तीय वर्ष में ही मिलने थे, लेकिन मिल नहीं पाए हैं। दूसरा मोर्चा है ब्याज में छूट का। राज्य सरकार चाहती है कि केंद्रीय हस्तक्षेप से विभिन्न योजनाओं के लिए पूर्व में लिए गए कर्जों पर देय ब्याज में कम से कम एक वर्ष के लिए छूट मिले।

इसके अलावा, राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम से छूट भी दिलाने की मांग की गई है। इसके तहत राजकोषीय घाटा कुल बजट के हिसाब से तीन फीसद से कम ही रहना चाहिए। राज्य सरकार इसे बढ़ाकर पांच फीसद तक करने की मांग करने जा रही है। बिहार और बंगाल की सरकारों ने भी ऐसा पूर्व में किया है। इसके अलावा आपदा के कारण विभिन्न प्रकार की समस्याओं को झेल रही सरकार तत्कालिक तौर पर 15 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग करने जा रही है। प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री को निर्णय लेना है।

कृषि मंत्री ने सीएम को लिखा पत्र, लावारिस पशुओं की स्थिति दयनीय

कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल ने मुख्यमंत्री का ध्यान लावारिस पशुओं की स्थिति की ओर आकृष्ट कराया है। मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में बादल ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन की अवधि में शहरी क्षेत्रों में लावारिस पशुओं की स्थिति काफी दायनीय हो गई है। पहले इन पशुओं को होटलों, स्थानीय दुकानदारों एवं नागरिकों से खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो जाता था। लेकिन, अभी बदली हुई परिस्थिति में इन पशुओं को कोई खाद्य पदार्थ उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कृषि मंत्री ने सुझाव दिया है कि लावारिस पशुओं की रक्षा के लिए शहरी निकायों, नगर निगमों, नगर परिषदों एवं नगर पंचायतों को आवश्यक निर्देश दिए जा सकते हैं।