झारखंड ने केंद्र से कोरोना राहत को मांगा 3653 करोड़ का कृषि पैकेज

रांची। झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार से कोरोना राहत के मद में 3653 करोड़ का कृषि पैकेज मांगा है। बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने मौजूदा चुनौतियों को उठाते हुए कृषि पैकेज की डिमांड की। मौके पर कृषि सचिव पूजा सिंघल व अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे। कृषि मंत्री बादल ने कोरोना के कारण किसानों के समक्ष उत्पन्न हुई चुनौतियों की ओर केंद्रीय कृषि मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया।

बादल ने राज्य के 35 लाख किसानों के लिए प्रति किसान 10 हजार रुपये के हिसाब से कुल 3500 करोड़ रुपये की मदद की मांग की। इसके अलावा दीदी किचन व गरीबों को दूध उपलब्ध कराने की योजना के लिए भी 153 करोड़ रुपये की मांग की। उन्होंने लॉक डाउन के कारण दूध की मांग कम होने का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में मिल्क फेडरेशन के प्लांट से दूध खरीद कर उसे गरीब व जरूरतमंद लोगों के बीच बंटवाया जा सकता है। इस मद में 12 करोड़ रुपये व्यय होंगे।

इस मद में उन्होंने केंद्र सरकार अगले छह माह के लिए 72 करोड़ की मदद करने को कहा। इसके अलावा राज्य में चलाए जा रहे दीदी किचन की जानकारी भी कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार को दी और इस किचन को सुचारू रूप से चलाने के लिए मदद की मांग भी की। उन्होंने कहा कि दीदी किचन को चलाने में करीब 13 करोड रुपये प्रतिमाह खर्च होंगे। मांग रखी कि मदद के तौर पर केंद्र सरकार अगले 6 माह के लिए 81 करोड़ की व्यवस्था करे।

कृषि मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंंसिंग के दौरान उपस्थित बिहार व पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्रियों से आग्रह किया कि वे झारखंड में पशु चारे की किल्लत को दूर करने में मदद करें। कृषि मंत्री ने लाखों की संख्या में राज्य के बाहर फंसे झारखंड के मजदूरों का मामला भी उठाया। बताया कि झारखंड में तीन माह की खेती के बाद राज्य के गरीब, आदिवासी किसान दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। किसान परिवार से जुड़े लोगों की वापसी का समाधान निकालने का आग्रह भी किया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार राज्यों की हरसंभव मदद करेगी।