याकूब मेमन की फांसी के 5 साल बाद फिर आधी रात को खुली सुप्रीम कोर्ट

निर्भया रेप केस के चारों दोषियों को अब से कुछ देर में फांसी दी जानी है। लेकिन इसे टालने के लिए दोषियों के वकील एपी सिंह की तरफ से हर तरह के हथकंडे अपनाए गए। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ एपी सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और रात को ढाई बजे सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा कम ही हुआ है कि आधी रात को अदालत किसी अर्जेंट मामले में बैठी हो। फांसी के मामले में ये दूसरा केस है, इससे पहले याकूब मेमन की फांसी के वक्त रात को तीन बजे सुनवाई हुई थी।

…जब आधी रात को बैठी सुप्रीम कोर्ट
1993 के मुंबई सीरियल धमाके के दोषी याकूब मेमन की याचिका को जब राष्ट्रपति की ओर से खारिज कर दिया गया था, तब 30 जुलाई 2015 की आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला था। वकील प्रशांत भूषण सहित कई अन्य वकीलों की तरफ से देर रात को फांसी टालने के लिए अपील की गई थी।

तब जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की एक बेंच ने रात के तीन बजे इस मामले को सुना था। 30 जुलाई 2015 की रात को 3।20 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी, जो कि सुबह 4।57 तक चली थी। हालांकि, फांसी टालने की इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। और बाद में याकूब मेमन को फांसी दी गई थी।

कर्नाटक मामले में भी खुली थी अदालत
फांसी के मामले से इतर राजनीतिक मसले को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट आधी रात को खुली थी। 2018 में कर्नाटक में जब राज्यपाल की तरफ से आधी रात को बीजेपी को सरकार बनाने का अवसर मिला था, तब कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और 17 मई 2018 को रात 2 बजे सुनवाई शुरू हुई और सुबह करीब 5 बजे तक चली थी। हालांकि, अदालत ने बीएस येदियुरप्पा की शपथ रोकने से इनकार किया था।