हनी ट्रैप: श्वेता स्वप्निल को मानव तस्करी केस में दोषमुक्त किए जाने पर HC में अपील करेगी SIT

भोपाल: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप से जुड़े मानव तस्करी केस में श्वेता स्वप्निल जैन को दोषमुक्त करने के भोपाल कोर्ट के फैसले को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) अब हाईकोर्ट में चुनौती देगी। एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार ने बताया कि भोपाल कोर्ट से सर्टिफाइड कॉपी मिलते ही हम हाईकोर्ट जाएंगे। अहम बात ये है कि न्यायाधीश भरत कुमार व्यास ने श्वेता स्वप्निल को दोषमुक्त करने के आदेश में लिखा है कि फरियादी मोनिका यादव और अन्य गवाहों के बयान में श्वेता स्वप्निल के संबंध में कोई तथ्य सामने नहीं आए।

वहीं जिला अभियोजन अधिकारी राजेंद्र उपाध्याय के मुताबिक इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल करेंगे। नियमानुसार 90 दिन के अंदर पुनरीक्षण याचिका पेश करनी होगी।

1 जज भरत कुमार व्यास ने फैसले में लिखा- फरियादी मोनिका यादव ने सात पेज के बयान में पांचवें पेज के तीसरे पैरे में सिर्फ इतना कहा है कि- मैंने सुना है कि श्वेता स्वप्निल के संपर्क श्वेता विजय जैन से भी बड़े लोगों से हैं। अन्य गवाहों के बयान में भी श्वेता स्वप्निल के संबंध में कोई भी तथ्य सामने नहीं आए हैं।
2 सीआईडी ने जिन ऑडियो-वीडियो की सीडी और गैजेट्स के आधार पर उसे आरोपी बनाया, उसे भी कोर्ट में पेश नहीं किया गया।
3 स्वप्निल पर धारा 120 बी आपराधिक षडयंत्र की धारा लगाई गई है, पर उसके प्रमाण नहीं है। मोनिका पर अनैतिक कार्य के लिए दबाव बनाने का सबूत उसके खिलाफ नहीं है।

सीआईडी निरीक्षक मनोज शर्मा द्वारा 27 दिसंबर 2019 को पेश चालान के अंतिम पृष्ठ पर लिखा गया है कि श्वेता स्वप्निल से जब्त गैजेट्स में उसके व मोनिका के आपत्तिजनक वीडियो हैं। इनके आधार पर उसकी श्वेता विजय जैन व आरती दयाल से संबद्धता और आपराधिक षडयंत्र में शामिल होना प्रमाणित होता है। अब एसआईटी ये दलील देगी : श्वेता स्वप्निल के खिलाफ अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं..निचली अदालत में सबूत पेश भी किए गए हैं।

मानव तस्करी केस में श्वेता स्वप्निल को जिन आरोपों के आधार पर आरोपी बनाया था, वो कोर्ट में पेश क्यों नहीं किए? क्या चालान पेश करते समय सीआईडी ने जानबूझकर सबूतों की अनदेखी की? जब्त सबूत कहां चले गये। कोर्ट को तो मिले ही नहीं?