देश के सबसे गरीब मंत्री हैं ‘ओडिशा के मोदी’, न अपना मकान और न परिवारनई दिल्लीः अपने सादा जीवन के लिये ‘ओडिशा के मोदी’ के नाम से मशहूर हुए पहली बार के सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी इस तुलना को सर्वथा अनुचति मानते हैं। ओडिशा के बालासोर से बीजू जनता दल के धनकुबेर प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा सांसद रहे रबिंद्र कुमार जेना को हराकर पहली बार लोकसभा में प्रवेश करने वाले सारंगी ने कहा, ‘‘लोग ऐसा क्यो कह रहे हैं पता नहीं। ‘ओडिशा का मोदी’ तुलना अनुचित है। जमीन आसमान का अंतर है। मैं सामान्य आदमी हूं और मोदी असाधारण व्यक्तित्व के धनी है।’ लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे धाराप्रवाह संस्कृत बोलने वाले सारंगी ने कहा, ‘‘मोदी इस देश को कितनी ऊंचाइयों पर ले गए हैं। भारत का गौरव चारों तरफ बढाया है। उनकी प्रतिभा और उनका सामर्थ्य अतुलनीय है। मैं उनके साथ अपनी तुलना को सर्वथा अनुचित मानता हूं।” उन्होंने कहा ,‘‘ मुझे इतना दायित्व उन्होंने दिया है और मुझ पर भरोसा जताया है। उस भरोसे पर खरा उतरना मेरी जिम्मेदारी बनती है।” 64 बरस के सारंगी कच्चे मकान में रहते हैं , साइकिल से घूमते हैं और अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा गरीब बच्चों पर खर्च करते हैं। उनकी सादगी की तस्वीरें उनके चुनाव जीतने के बाद से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उनकी लोकप्रियता का आलम अब यह है कि राष्ट्रपति भवन प्रांगण में गुरूवार को शपथ लेते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे ज्यादा तालियां उनके लिये बजी। उन्हें नयी सरकार में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग राज्यमंत्री और पशुपालन, दुग्ध विकास और मत्स्य पालन राज्यमंत्री बनाया गया है। शपथ ग्रहण के दौरान मिले स्नेह के अपने अनुभव को अद्भुत बताते हुए उन्होंने कहा ,‘‘ यह मेरे लिये आनंद का अनुभव था। जनता की श्रद्धा के कारण ऐसा हुआ। परमात्मा को धन्यवाद देता हूं कि मुझे इसके योग्य बनाया।” तीस बरस पहले रामकृष्ण मिशन में संन्यास के लिये गए सारंगी बूढी मां की सेवा के लिये लौट आये थे। उनकी मां का निधन हो चुका है और उन्होंने विवाह नहीं किया। फकीरीपन उनके स्वभाव का हिस्सा है और उनका कहना है कि मंत्री बनने के बाद भी वह बदलेंगे नहीं। सारंगी ने कहा ,‘‘मेरा स्वभाव कैसे बदल जायेगा। मैं राज्यमंत्री बनकर सादा जीवन क्यो नहीं बिता सकता। मैं वही रहूंगा जो हूं। मंत्री होने के बाद मेरी जिम्मेदारी पूरे राष्ट्र के प्रति है। इस विभाग का विस्तार से अध्ययन करके मैं बता सकता हूं कि क्या मेरा दायित्व है। ओडिशा मेरी जनम माटी है और इसका भी ध्यान रखूंगा।”

नई दिल्लीः अपने सादा जीवन के लिये ‘ओडिशा के मोदी’ के नाम से मशहूर हुए पहली बार के सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी इस तुलना को सर्वथा अनुचति मानते हैं। ओडिशा के बालासोर से बीजू जनता दल के धनकुबेर प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा सांसद रहे रबिंद्र कुमार जेना को हराकर पहली बार लोकसभा में प्रवेश करने वाले सारंगी ने कहा, ‘‘लोग ऐसा क्यो कह रहे हैं पता नहीं। ‘ओडिशा का मोदी’ तुलना अनुचित है। जमीन आसमान का अंतर है। मैं सामान्य आदमी हूं और मोदी असाधारण व्यक्तित्व के धनी है।’

लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे धाराप्रवाह संस्कृत बोलने वाले सारंगी ने कहा, ‘‘मोदी इस देश को कितनी ऊंचाइयों पर ले गए हैं। भारत का गौरव चारों तरफ बढाया है। उनकी प्रतिभा और उनका सामर्थ्य अतुलनीय है। मैं उनके साथ अपनी तुलना को सर्वथा अनुचित मानता हूं।” उन्होंने कहा ,‘‘ मुझे इतना दायित्व उन्होंने दिया है और मुझ पर भरोसा जताया है। उस भरोसे पर खरा उतरना मेरी जिम्मेदारी बनती है।” 64 बरस के सारंगी कच्चे मकान में रहते हैं , साइकिल से घूमते हैं और अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा गरीब बच्चों पर खर्च करते हैं। उनकी सादगी की तस्वीरें उनके चुनाव जीतने के बाद से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

उनकी लोकप्रियता का आलम अब यह है कि राष्ट्रपति भवन प्रांगण में गुरूवार को शपथ लेते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे ज्यादा तालियां उनके लिये बजी। उन्हें नयी सरकार में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग राज्यमंत्री और पशुपालन, दुग्ध विकास और मत्स्य पालन राज्यमंत्री बनाया गया है।
शपथ ग्रहण के दौरान मिले स्नेह के अपने अनुभव को अद्भुत बताते हुए उन्होंने कहा ,‘‘ यह मेरे लिये आनंद का अनुभव था। जनता की श्रद्धा के कारण ऐसा हुआ। परमात्मा को धन्यवाद देता हूं कि मुझे इसके योग्य बनाया।” तीस बरस पहले रामकृष्ण मिशन में संन्यास के लिये गए सारंगी बूढी मां की सेवा के लिये लौट आये थे। उनकी मां का निधन हो चुका है और उन्होंने विवाह नहीं किया। फकीरीपन उनके स्वभाव का हिस्सा है और उनका कहना है कि मंत्री बनने के बाद भी वह बदलेंगे नहीं।
सारंगी ने कहा ,‘‘मेरा स्वभाव कैसे बदल जायेगा। मैं राज्यमंत्री बनकर सादा जीवन क्यो नहीं बिता सकता। मैं वही रहूंगा जो हूं। मंत्री होने के बाद मेरी जिम्मेदारी पूरे राष्ट्र के प्रति है। इस विभाग का विस्तार से अध्ययन करके मैं बता सकता हूं कि क्या मेरा दायित्व है। ओडिशा मेरी जनम माटी है और इसका भी ध्यान रखूंगा।”

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