मिड डे मील में अनियमितताएं, अधिकारी डकार रहे बच्चों के हक का अनाज

सीहोर: गरीब बच्चों को भर पेट भोजन मिले जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंचे और उन्हें भूखा ना रहना पड़े। वहीं अधिकारियों की अनदेखी के कारण मिड डे मील में बच्चों को भरपेट भोजन नहीं दिया जाता है। अधिकारी बच्चों के हक का अनाज खुद डकार रहे हैं। एक ऐसा ही मामला नसरुल्लागंज क्षेत्र के ग्राम छापरी से सामने आया है। जहां बच्चों ने बताया कि भोजन कराते समय भोजन खत्म हो जाता है और मैन्यू के अनुसार भोजन भी नहीं दिया जाता है।

मंगलवार के दिन खीर पूरी देना अनिवार्य है, परंतु बच्चों का कहना है कि 15 अगस्त के बाद आज तक उन्हें खीर पुरी नही दी गई, तो वहीं भोजन में पानी वाली सब्जियां परोसी जाती हैं। एक बार भोजन परोसने के बाद किसी बच्चे को और चाहिए तो डबल नहीं दिया जाता, जिसके कारण कई बच्चों को खाली पेट उठना पड़ता है। जब मीडिया ने संबंधित अधिकारी कर्मचारियों से बात करने की कोशिश की तो जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन तक रिसीव नहीं किया।

वहीं जानकारी लेने पर पता चला कि कई महीनों से यहां कोई भी अधिकारी कर्मचारी मिड डे मील भोजन चेक करने तक नहीं आया। जिसके कारण समूह चलाने वाली महिलाओं के हौसले बुलंद हैं। सरकार जहां गरीब बच्चों को भर पेट भोजन देने के लिए करोड़ों रुपए का बजट देती है। वहीं स्थानीय कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गरीबों का निवाला उन तक नहीं पहुंच रहा है। जिसके कारण कई अनियमितताएं देखी जा रही हैं।

वहीं हम अगर सीहोर जिले की नसरुल्लागंज तहसील ब्लाक अंतर्गत आने वाले कई ग्रामों की करें तो इससे पहले भी कई मामले मीडिया द्वारा उजागर किए गए। परंतु आज तक किसी भी अधिकारी कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिसके कारण अधिकारियों के लिए यह कोई नई बात नहीं है ऐसे मामले आए दिन आते रहते हैं अधिकारी कर्मचारी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर देते हैं। वहीं सीहोर के जिला शिक्षा अधिकारी एसएस बिसेन ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। जल्दी ही में इसकी जांच कराता हूं।