महाराष्ट्र में सस्पेंस बरकरार- ड्राइविंग सीट पर राकांपा, राष्ट्रपति शासन के आसार

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी इसको लेकर सस्पेंस बना हुआ है। मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा से गठबंधन किनारा करने वाली शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार बनाने से फिलहाल चूक गई। शिवसेना सोमवार को राज्यपाल तय समय सीमा से पहले कांग्रेस और राकांपा का समर्थन पत्र हासिल नहीं कर सकी। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे व आदित्य ठाकरे ने राज्यपाल से 2 दिन का समय मांगा लेकिन राज्यपाल ने समय देने से इंकार कर दिया।

वहीं राज्यपाल ने राकांपा को न्यौता देकर मंगलवार शाम 8 बजे तक बहुमत संख्या दिखाने का समय दिया। इस पर राकांपा प्रमुख शरद पवार ने राज्यपाल से मुलाकात कर कहा कि हम सहयोगी से बात कर जवाब देंगे। वहीं अगर एनसीपी 24 घंटे में समर्थन नहीं जुटा पाती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन के आसार बढ़ सकते हैं। वहीं सोमवार को केंद्र में भारी उद्योग मंत्री एवं शिवसेना नेता अरविंद सावंत के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार से इस्तीफा देने के साथ ही 30 साल पुराना भगवा गठबंधन टूट गया।

महाराष्ट्र में किधर पड़ेगा पासा
ड्राइविंग सीट पर राकांपा

राज्यपाल ने अब राकांपा को समर्थन साबित करने का न्यौता दिया है। कांग्रेस उसे बिना शर्त समर्थन दे सकती है। सबसे आसान रास्ता है कि राकांपा मुख्यमंत्री पद के लिए ठाकरे परिवार से किसी का नाम आगे बढ़ा दे। मगर अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ है कि जिसे न्यौता दिया हो उसने सी.एम. के लिए दूसरे दल के नेता का नाम आगे बढ़ाया हो।

किंगमेकर की भूमिका में शिवसेना
राकांपा और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाएं और इसे समर्थन देकर शिवसेना किंगमेकर की भूमिका में आ सकती है, मगर इसकी संभावना नगण्य है। अगर उसे बैकसीट पसंद होती तो वह भाजपा के साथ बेहतर भूमिका में सरकार बना सकती थी। यह तभी संभव है जब शिवसेना हर हाल में राष्ट्रपति शासन को रोकना चाहे और भाजपा को नीचा दिखाना चाहे।

धैर्य के फल पर भाजपा की नजर
कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना के जीतकर आए विधायक सरकार न बनने से असंतुष्ट होंगे। उन्हें पार्टियां ज्यादा समय तक संभाल कर नहीं रख पाएंगी। फिलहाल राष्ट्रपति शासन और कुछ महीनों में पर्याप्त बहुमत जुट जाने पर भाजपा पूरे धैर्य से सरकार बनाने पर काम कर सकती है।

राष्ट्रपति शासन और मध्यावधि चुनाव
चारों प्रमुख दलों के समर्थन जुटा पाने में नाकाम रहने पर राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा कर सकते हैं। यह 6 महीने के लिए होगा। केंद्र सरकार चाहे तो इसकी अवधि और बढ़ाई जा सकती है। इस समय के दौरान किसी भी दल के समर्थन न जुटा पाने पर मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं।