पानी नहीं बचाया तो केपटाऊन जैसे सूख जाएंगे चेन्नई-बेंगलुरु

नई दिल्ली: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को आगाह किया कि अगर लोग पानी बचाने की अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तो भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा जल संकट से बुरी तरह प्रभावित होगा और चेन्नई व बेंगलुरु केपटाऊन जैसे सूख जाएंगे जहां पानी की कमी ने गंभीर रूप धारण कर लिया था। तेजी से शहरीकरण, बढ़ती आबादी और खराब जल प्रबंधन के कारण बेंगलुरु में नलकूप सूखने, भूजल स्तर गिरने और झीलें जहरीली होने लगी हैं।

बड़ी संख्या में लोगों के पास नल वाला पानी नहीं पहुंच रहा है और वे पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं। देश के एक और महानगर चेन्नई में भी स्थिति बेहतर नहीं है। शेखावत ने कहा कि प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता आजादी के समय 5,000 घन मीटर थी जो अब घटकर 1,540 घन मीटर रह गई है। उधर, एन.जी.टी. के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने कहा कि भारत में लोग नदियों को पूजते हैं। इसके बावजूद जल संसाधन सबसे प्रदूषित हैं।

प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता
पहले             अब
5,000          15,40

क्या हुआ था केपटाऊन में?
वर्ष 2017-18 में केपटाऊन में जल संकट गहरा गया था जब दक्षिण अफ्रीका की राजधानी में पानी पूरी तरह खत्म हो गया। इसके बाद ‘जीरो डे’ का विचार आया। ‘जीरो डे’ का अर्थ उस दिन से है जब शहर के सभी नलों से पानी आना बंद हो जाएगा और शहर में जल की किल्लत होगी।

1,068 मि.मी. बारिश, फिर भी जल संकट
औसतन भारत में प्रति वर्ष 1,068 मि.मी. बारिश होती है, फिर भी देश में जल संकट है। प्रति वर्ष 400 करोड़ घन मीटर पानी वर्षा के माध्यम से प्राप्त होता है, फिर भी देश में जल संकट है। इसराईल में प्रति वर्ष 100 मि.मी. बारिश होती है। उसके लिए इतना पानी पर्याप्त है और वह इस संसाधन का निर्यात करता है।