हरियाणा: मंत्रिमंडल गठन को लेकर फंसा पेंच, शाह करेंगे फैसला

चंडीगढ़: हरियाणा की नई गठबंधन सरकार में अब मंत्रिमंडल गठन को लेकर पेंच फंस गया है। यही वजह रही कि दीपावली के दिन मंत्री बनने के चाहवानों को मनोहर लाल ने झटका दे दिया। हालांकि मुख्यमंत्री के शपथ समारोह में पहले स्टेज पर मंत्रियों के लिए कुॢसयां लगाई गई थीं। गाडिय़ां भी सज-धज कर खड़ी थी लेकिन अंतिम समय में मंत्रिमंडल गठन को टाल दिया गया।

बताया गया कि भाजपा में सबसे ज्यादा रार अनिल विज की वरिष्ठता को लेकर है। विज सरकार में वरिष्ठता के लिहाज से नंबर 2 पर हैं और छठीं बार विधायक बने हैं। लिहाजा दुष्यंत की तरह से खुद को डिप्टी सी.एम. का पद चाहते थे लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने स्तर पर फैसला लेने के बजाय गेंद हाईकमान के पाले में डाल दी है। खैर, सोमवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल दिल्ली पहुंच गए हैं और हाईकमान से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि अब मंत्रियों के नाम पर आखिरी फैसला पार्टी अध्यक्ष अमित शाह करेंगे। दीपावली को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के शपथ समारोह के दिन 3 मंत्रियों के शपथ लेने की चर्चाएं थीं। इनमें विज, कंवरपाल गुर्जर और घनश्याम सर्राफ का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था। इसके बाद रविवार शाम को कैबिनेट मीटिंग भी रख दी थी, लेकिन जब मंत्री नहीं बने तो कैबिनेट मीटिंग रद्द कर दी गई। सूत्रों की मानें तो विज दुष्यंत के बाद मंत्री बनने को राजी नहीं थे।

उनका तर्क है कि वह छठीं बार के विधायक हैं और वरिष्ठता में मुख्यमंत्री के बाद के मंत्री हैं। लिहाजा उन्हें भी कैबिनेट मंत्री के बजाय उपमुख्यमंत्री का पद मिलना चाहिए।राजभवन में नए मंत्रियों को निहारती रही गाडिय़ां और स्टाफ
हरियाणा की मुख्य सचिव के आदेशों के तहत रविवार सुबह 8 गाडिय़ां सज-धज कर मंत्रियों के लिए राजभवन में खड़ी हो गई थी। उनके साथ सचिवालय से मंत्रियों के सैक्रेटरी और पी.ए. सरीखे स्टाफ को भी बुलाया गया था। घंटों तक स्टाफ नए मंत्री का इंतजार करते रहे लेकिन दुष्यंत की शपथ के बाद कार्यक्रम खत्म होते ही मायूसी छा गई और गाडिय़ां व स्टाफ वापस लौट गए।
भाजपा विधायकों में मंत्री पद को लेकर जोड़-तोड़ शुरू
गठबंधन सरकार में मंत्री बनने को लेकर भाजपा विधायकों में जोड़-तोड़ तेज हो गई है। हर कोई मुख्यमंत्री से लेकर हाईकमान तक सैटिंग करने में जुटा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो मंत्रिमंडल में जातीय और क्षेत्रीयता को ही तवज्जो दी जाएगी, क्योंकि भाजपा के खाते में ही पहले ही चार सीटें कम हो गई है। पार्टी में हो रही चर्चाओं पर यकीन करें तो विज, गुर्जर और बनवारी लाल के अलावा अहीरवाल से अभय यादव, वैश्य समुदाय से दीपक मंगला, दलित समाज से बिशंभर वाल्मीकि, ब्राह्मण समुदाय से मूलचंद शर्मा, पंजाबी समुदाय से सुभाष सुधा और जाट समुदाय से महीपाल ढांडा या कमलेश ढांडा मंत्री बन सकते हैं।

जजपा में भी 3 मंत्री बनने को लेकर जबरदस्त लॉङ्क्षबग
जजपा भी अपने कोटे के मंत्री तय करने में जातीय संतुलन साध रही है लेकिन यहां भी मंत्री पद हथियाने के लिए विधायकों में लॉङ्क्षबग तेज हो गई है। जजपा के कोटे में डिप्टी सी.एम. के अलावा एक कैबिनेट व 2 राज्य मंत्री के पद आए हैं। 10 विधायकों वाली जजपा में नारनौंद से चुनाव जीते रामकुमार गौतम के मंत्री बनने की संभावना है। रामकुमार गौतम ने भाजपा के सुपर मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को 12 हजार से अधिक मतों से पराजित किया है। गुहला चीका से चुनाव जीते पूर्व राज्यसभा सदस्य ईश्वर सिंह और टोहाना से विधायक देवेंद्र सिंह बबली को मंत्री बनाया जा सकता है।

ईश्वर सिंह मौजूदा 90 विधायकों में से सबसे वरिष्ठ हैं वह 1977 में पहली बार विधायक बने थे। बबली ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को 52 हजार से अधिक मतों से हराकर रिकार्ड बनाया है। सूत्रों की मानें तो बबली के नाम को लेकर भाजपा में भी अंदरूनी विवाद छिड़ गया है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला इस बात पर अड़ गए हैं कि किसी भी तरह से बबली को मंत्री न बनाया जाए। उधर, दुष्यंत चौटाला इस बात पर अडिग हैं कि वह बबली को मंत्री बनाएंगे। उन्होंने भाजपा को साफ कह दिया कि वह अपने कोटे से किसे मंत्री बनाए, यह उन्होंने देखना है।वहीं, गठबंधन सरकार में कुछेक निर्दलीय विधायकोंं को भी मंत्री बनाकर महत्व दिया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो रोहतक जिले के महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू व नयनपाल रावत को मंत्री बनाया जा सकता है।