अयोध्या विवाद: 40 दिन तक चली सुनवाई हुई पूरी, 23 दिन में फैसला आने की उम्मीद

अयोध्याः राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई तय वक्त से पहले पूरी हो गई है। न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में 40 दिन तक दलीलें सुनीं। हिंदू पक्ष की ओर से निर्मोही अखाड़ा, हिंदू महासभा, रामजन्मभूमि न्यास तो वहीं मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने अपनी दलीलें रखीं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में फैसला 23 दिन में आने की उम्मीद है।

वकीलों की ओर से मामले में रखी गईं ये दलीलें:- 

  • 15:42 PM- धवन ने हिंदू पक्षकारों की दलीलों का जवाब देते हुए कहा कि यात्रियों की किताबों के अलावा इनके पास टाइटल यानी मालिकाना हक का कोई सबूत नहीं है। इनकी विक्रमादित्य मंदिर की बात मान भी लें तो भी ये रामजन्मभूमि मंदिर की दलील से मेल नहीं खाता। 1886 में फैजाबाद कोर्ट कह चुका था कि वहां हिंदू मंदिर का कोई सबूत नहीं मिला, हिंदुओं ने उसे चुनौती भी नहीं दी। धवन ने कहा कि अगर हिंदू 1885 से टाइटल साबित करने में सक्षम हैं, तो मैं इसके जवाब में दो शताब्दियों से अधिक पहले से इस जगह का मालिक हूं।
  • 15:15 PM-  राजीव धवन ने इस दौरान फैसले के अनुवाद पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने अनुवाद को जायज ठहराया और एक पैरा पढ़ा, लेकिन हम उन्हें पहले सुन चुके हैं। बाबर के द्वारा मस्जिद के निर्माण के लिए ग्रांट और लगान माफी देने के दस्तावेज हैं। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ग्रांट से आपके मालिकाना हक की पुष्टि कैसे होती है? धवन ने कहा जमींदारी और दीवानी के जमाने को देखें तो जमीन के मालिक को ही ग्रांट मिलती थी। इनकी दलील मूर्खतापूर्ण है। इसपर पीएन मिश्रा ने कहा कि उन्होंने लैंडलॉज पर दो किताबें लिखी हैं और आप कह रहे हैं मुझे कानून नहीं पता। जिसके बाद धवन ने कहा कि आपकी किताबों को सलाम, उनपर PHD कर लें।
  • 14:58 PM- मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि हिंदू पक्षकारों ने कुरान के हवाले से जो दलीलें दी हैं, वो आधारहीन हैं। हम अपनी जमीन पर कब्जा वापस चाहते हैं। जिन कागजातों की बात हो रही है, उसके 4-4 मतलब हैं। पहला उर्दू, फिर हिंदी जो जिलानी की तरफ से हुआ, फिर एक हिंदी जो हाईकोर्ट जस्टिस अग्रवाल की ओर से किया गया। 2017 में चौथा ट्रांसलेशन हुआ।
  • 14:52 PM- मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि ये वायरल हो गया है कि मैंने कोर्ट में नक्शा फाड़ा, लेकिन मैंने ये कोर्ट के आदेश पर किया। मैंने कहा था कि मैं इसे फेंकना चाहता हूं तब चीफ जस्टिस ने कहा कि तुम इसे फाड़ सकते हो। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने कहा था कि अगर आप फाड़ना चाहें तो फाड़ दें।
  • 14:51 PM- इसके बाद राजीव धवन ने बहस शुरू की। उन्हें बोलने के लिए डेढ़ घंटे का वक्त मिला है। धवन ने कहा कि धर्मदास ने केवल ये साबित किया कि वो पुजारी है न कि गुरु। इसके अलावा हिंदू महासभा की तरफ से सरदार रविरंजन सिंह, दूसरी विकाश सिंह, तीसरा सतीजा और चौथा हरिशंकर जैन के सबूत दिए गए हैं। इसका मतलब महासभा 4 हिस्सों में बंट गया है।
  • 14:51 PM- पीएन मिश्रा ने सुनवाई के दौरान टेफन थेलर और निकोलो मनूची जैसे 16वीं सदी में आए विदेशी यात्रियों के वृतांत का जिक्र किया। जिसमें मंदिर का तो जिक्र है पर मस्जिद का नहीं। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश गजेटियर में भी राममंदिर का ही जिक्र है। जस्टिस बोबड़े ने क्रोनोलॉजी बताने को कहा, तो जस्टिस चंद्रचूड़ ने लिमिटेशन का सवाल उठाया।
  • 14:26 PM- लंच के बाद बुद्धिस्ट सभा की ओर से वकील रणजीत थॉमस ने दलील देने की कोशिश की, जिसे कोर्ट ने सुनने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि हमने आपको डीटैग कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि हम हरिशंकर जैन, पीएन मिश्रा और राजीव धवन को ही सुनेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को सुनने से भी इनकार कर दिया।
  • 13:17 PM- अब शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दलील शुरू हुई। शिया बोर्ड की ओर से कहा गया कि हमारा विवाद शिया बनाम सुन्नी बोर्ड को लेकर है, इस पर सुन्नियों का दावा नहीं बनता है। शिया वक्फ बोर्ड की ओर से एमसी धींगड़ा ने कहा कि वहां पर शिया मस्जिद थी। 1966 में आए फैसले से हमे बेदखल किया गया था। 1946 में दो जजमेंट आए थे एक हमारे पक्ष में और दूसरा सुन्नी के पक्ष में। 20 साल बाद 1966 में कोर्ट ने हमारा दावा खारिज कर दिया। इसी के साथ अदालत लंच के लिए उठ गई।
  • 12:55 PM- निर्मोही अखाड़ा की तरफ से सुशील जैन अपनी दलील रख रहे हैं। सुशील जैन ने कहा कि बाबर ने मंदिर गिराकर मस्जिद को बनाया। 1885 से मुस्लिम इस मामले की सुनवाई करने को कहते हैं, लेकिन ऐसा नही है। 1858 गवर्नमेंट आफ इंडिया एक्ट में ब्रिटिश सरकार ने बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त कर दिया था। ऐसे में अक्टूबर 1860 जन्मस्थान मस्जिद को ग्रांट देने का सवाल नहीं उठता।
  • 12:22 PM- हिंदू महासभा की तरफ से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने एक नक्शा किताब से दिखाया। उन्होंने कहा कि इस नक्शे में भगवान राम के जन्मस्थान का सही लोकेशन है, जो अब तक किसी ने कोर्ट को नहीं बताया। इसका धवन ने विरोध किया। उन्होंने कहा मैं इस डॉक्यूमेंट को नहीं मानता। इस पर CJI  ने कहा अगर आप नहीं मानते तो कोई बात नहीं। विकास सिंह भी सिर्फ बयान दे रहे हैं। इसके बाद धवन ने नक्शा फाड़ दिया। धवन के नक्शा फाड़ने पर CJI नाराज हो गए।
  • 12:07 PM- इसके बाद हिंदू महासभा की तरफ से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने बहस शुरु की। विकास सिंह ने किशोर कुणाल की लिखी किताब को रिकॉर्ड पर कोर्ट के समक्ष रखने की पेशकश की। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया। विकास ने कोर्ट को बुक दी। CJI ने कहा कि वो नवंबर में इस किताब को पढ़ेंगे। विकास ने कहा कि फैसले से पहले इस किताब को पढ़िएगा। CJI ने हंसते हुए कहा देखते हैं।
  • 11:57 AM- अब निर्वाणी अखाड़ा की तरफ से वकील जयदीप गुप्ता ने बहस की शुरुआत की, जिसका निर्मोही अखाड़ा ने विरोध किया। इस पर CJI ने कहा 5 मिनट इनको सुनने में कोई हर्ज नहीं है। निर्वाणी अखाड़ा हनुमानगढ़ी की तरफ से कहा गया कि भगवान की मूर्ति बाबा धर्मदास और अन्य के द्वारा रखी गई। बाबा अभिराम दास के खिलाफ इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज हुई थी। बाबा अभिराम दास ने 1962 में पुजारी के रूप में पूजा का अधिकार मांगा था। निर्वाणी अखाड़ा की तरफ से बहस पूरी हो गई।
  • 11:47 AM- वहीं वैद्यनाथन के बाद गोपाल सिंह विशारद की ओर से रंजीत कुमार ने अपनी दलील शुरु की। रंजीत कुमार ने कहा कि हिंदुओं की ओर से पूजा का अधिकार पहले मांगा गया था, लेकिन मुस्लिम रूल में हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलने में दिक्कत आई थी। उन्होंने कहा कि कैलाश पर्वत पर शिव कि मूर्ति या कोई देवता का चिन्ह नहीं है, लेकिन पूरे पर्वत को देवता के तौर पर पूजा जाता है। हिंदुओं के कण-कण में भगवान की मान्यता है। इसके बाद रंजीत कुमार की तरफ से बहस पूरी हो गई।
  • 10:50 AM- सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्षकार के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि 1885 तक हिंदू-मुस्लिम उस जमीन पर पूजा का दावा करते थे, लेकिन बाद में ब्रिटिश सरकार ने वहां पर रेलिंग करवा दी। अब मुस्लिम पक्ष बाहरी और आंतरिक आहते पर विवाद कर रहा है, वो छोटी-सी जगह को बांटना चाहते हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आपका 1885 के बाद पूजा का क्या आधार है? वैद्यनाथन ने कहा कि ब्रिटिशों की रेलिंग के बाद भी हिंदू लगातार पूजा करते रहे थे, लेकिन बाद में मुगलों ने जबरन मस्जिद बना दी थी। 45 मिनट पूरे होने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन को कहा कि अब आपका समय पूरा हो गया है।

CJI बोले- आज शाम 5 बजे तक पूरी हो अयोध्या मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि आज हरहाल में 5 बजे तक सुनवाई पूरी होगी। 5 सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अब बहुत हो चुका। सवाई आज ही यानी 16 अक्टूबर को खत्म होगी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को 39वें दिन की सुनवाई के दौरान हिंदू और मस्लिम पक्षकारों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ पूर्व महान्यायवादी और वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण की दलीलें सुन रही थी। वह 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य द्वारा दायर मुकदमें का जवाब दे रहे थे, ताकि अयोध्या में विवादित स्थल पर दावा किया जा सके।

10 दिसंबर तक अयोध्या में धारा 144 लागू
उल्लेखनीय है कि, अयोध्या विवाद के संभावित फैसले को लेकर 10 दिसंबर तक यहां धारा 144 लागू कर दी गई है। डीएम अनुज कुमार झा ने बताया कि अयोध्या विवाद के संभावित फैसले, दीपोत्सव, चेहल्लुम व कार्तिक मेले को लेकर 2 महीने तक जनपद में धारा-144 लागू रहेगी। अयोध्या फैसले को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है। दलीलों के दरवाजे इसी हफ्ते बंद हो जाएंगे और मामले पर फैसला दिवाली के बाद सुनाया जाएगा।