अयोध्या विवाद के फैसले का काउंटडाउन: मुस्लिम पक्ष के वकील ने फाड़ा राम मंदिर का नक्शा

अयोध्याः सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान पल-पल बदलते घटनाक्रम के बीच मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बुधवार को नक्शा और दस्तावेज फाड़ डाले। संविधान पीठ के समक्ष ऑल इंडिया हिंदू महासभा के वकील विकास कुमार ने कुणाल किशोर की पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ पेश किए। धवन ने इस पर आपत्ति जताई और न्यायालय से आग्रह किया कि इस पुस्तक को रिकॉर्ड में नहीं लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक हाल ही में लिखी गई है और इसे साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जा सकता। विकास ने फिर एक नक्शे का हवाला दिया और इसे तय नियमों के तहत मुस्लिम पक्ष के वकील को भी सौंपा। धवन ने उस नक्शे को फाड़ दिया। इस पर CJI ने नाराजगी भरे लहजे में कहा, ‘कुछ और भी फाड़ दीजिए।’ जिसके बाद धवन ने और भी दस्तावेज फाड़ दिए। CJI ने कहा,‘यदि ऐसे ही चलता रहा तो हम उठकर चले जाएंगे।’

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  • 13:17 PM- अब शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दलील शुरू हुई। शिया बोर्ड की ओर से कहा गया कि हमारा विवाद शिया बनाम सुन्नी बोर्ड को लेकर है, इस पर सुन्नियों का दावा नहीं बनता है। शिया वक्फ बोर्ड की ओर से एमसी धींगड़ा ने कहा कि वहां पर शिया मस्जिद थी। 1966 में आए फैसले से हमे बेदखल किया गया था। 1946 में दो जजमेंट आए थे एक हमारे पक्ष में और दूसरा सुन्नी के पक्ष में। 20 साल बाद 1966 में कोर्ट ने हमारा दावा खारिज कर दिया। इसी के साथ अदालत लंच के लिए उठ गई।
  • 12:55 PM- निर्मोही अखाड़ा की तरफ से सुशील जैन अपनी दलील रख रहे हैं। सुशील जैन ने कहा कि बाबर ने मंदिर गिराकर मस्जिद को बनाया। 1885 से मुस्लिम इस मामले की सुनवाई करने को कहते हैं, लेकिन ऐसा नही है। 1858 गवर्नमेंट आफ इंडिया एक्ट में ब्रिटिश सरकार ने बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त कर दिया था। ऐसे में अक्टूबर 1860 जन्मस्थान मस्जिद को ग्रांट देने का सवाल नहीं उठता।
  • 12:22 PM- हिंदू महासभा की तरफ से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने एक नक्शा किताब से दिखाया। उन्होंने कहा कि इस नक्शे में भगवान राम के जन्मस्थान का सही लोकेशन है, जो अब तक किसी ने कोर्ट को नहीं बताया। इसका धवन ने विरोध किया। उन्होंने कहा मैं इस डॉक्यूमेंट को नहीं मानता। इस पर CJI  ने कहा अगर आप नहीं मानते तो कोई बात नहीं। विकास सिंह भी सिर्फ बयान दे रहे हैं। इसके बाद धवन ने नक्शा फाड़ दिया। धवन के नक्शा फाड़ने पर CJI नाराज हो गए।
  • 12:07 PM- इसके बाद हिंदू महासभा की तरफ से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने बहस शुरु की। विकास सिंह ने किशोर कुणाल की लिखी किताब को रिकॉर्ड पर कोर्ट के समक्ष रखने की पेशकश की। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया। विकास ने कोर्ट को बुक दी। CJI ने कहा कि वो नवंबर में इस किताब को पढ़ेंगे। विकास ने कहा कि फैसले से पहले इस किताब को पढ़िएगा। CJI ने हंसते हुए कहा देखते हैं।
  • 11:57 AM- अब निर्वाणी अखाड़ा की तरफ से वकील जयदीप गुप्ता ने बहस की शुरुआत की, जिसका निर्मोही अखाड़ा ने विरोध किया। इस पर CJI ने कहा 5 मिनट इनको सुनने में कोई हर्ज नहीं है। निर्वाणी अखाड़ा हनुमानगढ़ी की तरफ से कहा गया कि भगवान की मूर्ति बाबा धर्मदास और अन्य के द्वारा रखी गई। बाबा अभिराम दास के खिलाफ इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज हुई थी। बाबा अभिराम दास ने 1962 में पुजारी के रूप में पूजा का अधिकार मांगा था। निर्वाणी अखाड़ा की तरफ से बहस पूरी हो गई।
  • 11:47 AM- वहीं वैद्यनाथन के बाद गोपाल सिंह विशारद की ओर से रंजीत कुमार ने अपनी दलील शुरु की। रंजीत कुमार ने कहा कि हिंदुओं की ओर से पूजा का अधिकार पहले मांगा गया था, लेकिन मुस्लिम रूल में हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलने में दिक्कत आई थी। उन्होंने कहा कि कैलाश पर्वत पर शिव कि मूर्ति या कोई देवता का चिन्ह नहीं है, लेकिन पूरे पर्वत को देवता के तौर पर पूजा जाता है। हिंदुओं के कण-कण में भगवान की मान्यता है। इसके बाद रंजीत कुमार की तरफ से बहस पूरी हो गई।
  • 10:50 AM- सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्षकार के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि 1885 तक हिंदू-मुस्लिम उस जमीन पर पूजा का दावा करते थे, लेकिन बाद में ब्रिटिश सरकार ने वहां पर रेलिंग करवा दी। अब मुस्लिम पक्ष बाहरी और आंतरिक आहते पर विवाद कर रहा है, वो छोटी-सी जगह को बांटना चाहते हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आपका 1885 के बाद पूजा का क्या आधार है? वैद्यनाथन ने कहा कि ब्रिटिशों की रेलिंग के बाद भी हिंदू लगातार पूजा करते रहे थे, लेकिन बाद में मुगलों ने जबरन मस्जिद बना दी थी। 45 मिनट पूरे होने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन को कहा कि अब आपका समय पूरा हो गया है।

CJI बोले- आज शाम 5 बजे तक पूरी हो अयोध्या मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि आज हरहाल में 5 बजे तक सुनवाई पूरी होगी। तय पक्षकारों के अलावा किसी को बोलने की इजाजत नहीं मिलेगी। 5 सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अब बहुत हो चुका। सुनवाई आज ही यानी 16 अक्टूबर को खत्म होगी। सुप्रीम कोर्ट में आज हिंदू पक्ष की ओर से निर्मोही अखाड़ा के वकील अपनी अंतिम दलील देंगे। वकील सीएस वैद्यनाथन को बहस के लिए 45 मिनट मिलेंगे। इसके अलावा हिंदू पक्षकारों के अन्य वकीलों को भी इतना ही समय मिलेगा। बाद में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को जवाब देने के लिए 1 घंटे का समय मिलेगा।

‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ के लिए रिजर्व रखा गया 17 अक्टूबर का दिन
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई का आखिरी दिन 17 अक्टूबर तय किया था, लेकिन बहस के लिए आखिरी दिन 16 अक्टूबर है। 17 अक्टूबर को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ के लिए रिजर्व रखा गया है। इस दौरान दोनों पक्षकार अपनी मांग सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को 39वें दिन की सुनवाई के दौरान हिंदू और मस्लिम पक्षकारों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ पूर्व महान्यायवादी और वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण की दलीलें सुन रही थी। वह 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य द्वारा दायर मुकदमें का जवाब दे रहे थे, ताकि अयोध्या में विवादित स्थल पर दावा किया जा सके।

10 दिसंबर तक अयोध्या में धारा 144 लागू
उल्लेखनीय है कि, अयोध्या विवाद के संभावित फैसले को लेकर 10 दिसंबर तक यहां धारा 144 लागू कर दी गई है। डीएम अनुज कुमार झा ने बताया कि अयोध्या विवाद के संभावित फैसले, दीपोत्सव, चेहल्लुम व कार्तिक मेले को लेकर 2 महीने तक जनपद में धारा-144 लागू रहेगी। अयोध्या फैसले को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है। दलीलों के दरवाजे इसी हफ्ते बंद हो जाएंगे और मामले पर फैसला दिवाली के बाद सुनाया जाएगा।