हाथ में डंडा थामे सड़क पर निकले SDM, काली माता विसर्जन में निभाई पुलिस अफसर की भूमिका

जबलपुर: अभी तक आपने पुलिसकर्मियों के हाथ पर डंडा देखा होगा, लेकिन अब एक ऐसी तस्वीर सामने आई है। जब कानून और व्यवस्था को संभालने के लिए SDM ने खुद पुलिस कर्मियों के साथ डंडा थामकर व्यवस्था संभालने के लिए खड़े हो गए। वह रात से लेकर सुबह तक पुलिसकर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लॉ एंड ऑर्डर को कंट्रोल करते रहे। ये तस्वीरें जिसने भी देखी उसने यही कहा कि ऐसे अफसर के रहते कानून व्यवस्था कभी नहीं बिगड़ सकती।

भीड़ के बीचों बीच चलने वाले ये अफसर SDM आशीष पांडे हैं, जो जबलपुर के गोरखपुर संभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं। जबलपुर में पड़ाव वाली मां काली माता के विसर्जन पर प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। इनका विसर्जन शरद पूर्णिमा को किया जाता है, पिछली बार विसर्जन के दौरान आगजनी की भी घटना हुई थी। जिसके बाद से विसर्जन को लेकर खासे इंतजाम पुलिस और प्रशासन के द्वारा किए जाते हैं।

इस बार शरद पूर्णिमा में सुबह 5:00 बजे काली माता का भटौली कुंड में विसर्जन होना था। इस विसर्जन को लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी की थी। पुलिस बल के साथ-साथ प्रशासन की पूरी टीम इस विसर्जन को शांतिपूर्वक कराने के लिए जुटी हुई थी। लगभग 5 हजार बल विसर्जन के लिए जुटा हुआ था, क्योंकि भटौली कुंड गोरखपुर में ही आता है इसलिए शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी एसडीएम गोरखपुर आशीष पांडे के हाथ थी।

काली माता के सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित करके पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में किस तरह से शांतिपूर्वक विसर्जन कराया जाए, इसकी रूपरेखा का निर्माण एसडीएम आशीष पांडे ने किया। एसडीएम आशीष पांडे उस वक्त अपनी कार्य योजना को अंजाम दे रहे थे, और व्यवस्थाओं में जुटे हुए थे। जबकि मध्य प्रदेश के तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर थे। आशीष पांडे रात 9:00 से लेकर सुबह 6:00 बजे तक रामपुर से लेकर भटौली कुंड की व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे थे। एक वक्त ऐसा भी आया जब वे  हाथ में डंडा थामे आगे आगे व्यवस्थाओं का संचालन करते नजर आए।

अक्सर ऐसी तस्वीरें कम ही नजर आती हैं। जब कोई एसडीएम हाथ में डंडा लेकर सुरक्षा व्यवस्था में भी लग जाए लेकिन जब इच्छा शक्ति की बात होती है तो कोई भी अफसर सब कुछ करने के लिए तैयार हो जाता है उसके बदले बस शहर में अमन और चैन होना चाहिए एसडीएम आशीष पांडे ने ठीक वैसा ही किया जब उनके हाथ में डंडा था में पुलिस बल के साथ वे आगे बढ़ते रहे और  लाखों की भीड़ के बीच काली माता का विसर्जन भी कराया।

CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट रह चुके हैं आशीष…
आशीष पांडे के हाथ में डंडा देख कर कुछ लोगों को आश्चर्य जरूर लगा। लेकिन असल बात यह है कि आशीष पांडे CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने बेहतरीन पुलिसिंग के गुण को भी सीखा है और उन गुणों का इस्तेमाल जब जबलपुर में करने की बारी आई तो उन्होंने एक बार फिर डंडा हाथ में लेने पर गुरेज नहीं किया। वह साथी कर्मियों को दिशा-निर्देश भी देते रहे और खुद भीड़ को कैसे कंट्रोल किया जाता है। उसको बखूबी अंजाम भी देते रहे। जिसका यह परिणाम निकल कर आया की निर्विघ्न विसर्जन में लगी पूरी टीम को सफलता हाथ लगी, और पड़ाव वाली काली माता को  लेकर विसर्जन कुंड तक किसी भी तरह की समस्या नहीं आई। कहा तो ये भी जाता है कि, हालातों को देखकर उसमें ढल जाना ही बेहतर होता है। यह ख़ूबी आशीष पांडे बेहतर समझते हैं, और उन्होंने इस वक्त पुलिस के साथ प्रशासन की व्यवस्थाओं को भी देखा और साथ ही एक सफल आयोजन को भी आगे बढ़ाया।