भोपाल की जीवन रेखा पर खास लेख : भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार अमजद खान की कलम से

भोपाल की जीवन रेखा
बड़ी झील
हिंदुस्तान में मशहूर भोपाल ताल यूँ तो किसी ज़माने कहा जाता था तालों में ताल भोपाल ताल लेकिन जिस तरह आज इसका स्वरूप है यह किसी नाले की शक्ल लेती हुई छोटी सी छिल की मानिंद अपना अस्तित्व खोती नज़र आरही है इसके ज़िम्मेदार शहर वासी ओर भोपाल नगर निगम प्रशासन खुद है कहने को शहर में नगर निगम में झील संरक्षण प्रकोष्ठ तो है लेकिन झीलों का कितना संरक्षण हुआ है यह बात किसी से छुपी नही है
हमीदिया अस्पाल ओर कमल नेहरू अस्पताल की सारी गंदगी नाले के ज़रिए इस तालाब में वर्षों से मिल रही है जो आज तक बंद नही हुई है वही बड़े तालाब से लगे कई सर्विस स्टेशन जो रॉयल मार्किट से लेकर कर्बला रोड तक दिन ब दिन खुलते जा रहें हैं जिनकी अगर जांच कराई जाए तो इनके पास घरेलू कनेक्शन है और मोटरें लगा कर रोज़ हज़ारों गेलन पानी से यहां सिर्फ गाड़ियां धुलती है जंहा एक तरफ झील का जल ईस्टर गिरने के साथ लोगों को पीने का पानी नही मिल रहा शहर में एक दिन बीच पानी सप्लाई किया जा रहा है इन्हें रोज़ 2 घंटे पानी दिया जाता है जिसमे कंही न कंही नगर निगम जल कार्ये विभाग के अधिकारियों की मिली भगत का अंदेशा प्रतीत होता है ।

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ताके प्रशासन को भी पता चले के यह कितना जरूरी है झील को संरक्षित करना